वेल्डिंग टॉर्च(welding

torch)कैसे जलाया जाता है?

दोस्तो स्वागत है आपका मेरे वेबसाइट पर दोस्तों हम आज वेल्डिंग टार्च जलाने की विधि को जानेंगे तो दोस्तों आइये जानते है –

वेल्डिंग की शुरुआत करते समय वेल्डिंग के सभी उपकरणों को आपस मे जोड़ दिया जाता है।जॉब को भी पूरी तरह से तैयार कर दिया जाता है।जिसके बाद टार्च जलाने की प्रक्रिया शुरु की जाती हैं।

●गैस सिलेंडर को कंपनी मे बने स्टोर से जहा वेल्डिंग का कार्य करना है।वहा पर ट्रॉली की सहायता से लाया जाता है।जिसे चैन से बांध दिया जाता हैं ताकि वह ना गिरे।

●उपयोग मे आने वाले ओक्सिजन और एसिटिलीन के सिलेंडरों में वाल्व को लगाकर रख देते है।वाल्व लगाकर उन्हे दबाया जाता है ताकि सिलेंडर मे मौजुद या वाल्व मे मौजुद मिट्टी के कण और उनमे उपस्थित गंदगी को बाहर निकाला जा सके।

 

●ओक्सिजन तथा एसिटिलीन के प्रेसर रेगुलेटर को दोनो सिलेंडरों मे लगा दिया जाता है।इनके प्रेसर को नापने के लिए स्पेनर का प्रयोग करे।ताकि कोई आगे खतरा ना हो।

 

●हमे दो होज पाइप को लेना है,लाल और हरा हरे होज पाइप को सादे नट वाले निपिल के ऊपर चढाकर ओक्सिजन सिलेंडर मे लगाना है।और लाल होज पाइप को ग्रुव बने हुए निपिल पर घुसाकर एसिटिलीन सिलेंडर मे फीट करना होगा।

●इन दोनो होज पाइप के दुसरे सिरे मे वेल्डिंग टार्च को फीट करे।

●याद रहे की कार्य की आवश्यकता के अनुसार ही नॉज़ल का चुनाव करे।फिर वेल्डिंग टॉर्च मे फीट करे।नही तो जाब को हानि पहुच सकती है।

●टार्च के दोनो निडिल वॉल्व को घड़ी की चलने की दिशा(क्लॉकवाईज) घुमा कर बन्द कर दे।

●रेगुलेटर के ऊपर और किनारे मे लगे दोनो स्क्रू को वापस घुमाये जब तक की वो दोनो फ़्री ना घुमने लगे।

●अब एसिटिलीन सिलेंडर वाल्व को ¼ से 1/2 चुड़ी तक खोले तथा ओक्सिजन वाल्व को भी खोल दे।

●टॉर्च के एसिटिलीन वाल्व को एक टर्न खोल दे तथा अब एसिटिलीन रेगुलेटर के ऐडजस्टिंग स्क्रू को घड़ी की दिशा मे(क्लॉक वाईज) इतना घुमाये कि एसिटिलीन टॉर्च से बाहर आने लगे।

●स्पार्क लाईटर की सहायता से ब्लो पाइप को जलाए।

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●अब एसिटिलीन के प्रेसर रेगुलेटर स्क्रू को इस प्रकार सेट करो कि टॉर्च टिप तथा फ्लेम के मध्य 5-6मिमी का अन्तराल बन जाए।यही वेल्डिंग टॉर्च की इस टिप के लिए उचित प्रेसर होगा।

●ओक्सिजन निडिल वॉल्व को खोलकर वांछित प्रकार की ज्वाला प्राप्त की जा सकती है।प्रारंभ मे यह एसिटिलीन फ्लेम होती है।

●ओक्सिजन की मात्रा बढ़ाते जाने पर क्रमशः कार्बूरैज़ीन्ग फ्लेम,रिडुसींग फ्लेम,न्यूट्रल फ्लेम तथा अन्त मे ऑक्सीडाइनिंग फ्लेम प्राप्त होती है।

●जब वेल्डिंग का कार्य समाप्त हो जाए तो पहले टॉर्च मे लगे एसिटिलीन निडिल वाल्व को बन्द किया जाता है।

●ओक्सिजन सिलेंडर का वाल्व भी बन्द कर दिया जाता है।

●टॉर्च का ओक्सिजन कण्ट्रोल वाल्व खोलकर होज पाइप तथा रेगुलेटर का दाब वायुमंडल में छोड़ा जा सकता है।

●ओक्सिजन रेगुलेटर के डायफ्राम का प्रेशर भी घटा दिया जाता है।

●टॉर्च के ओक्सिजन कण्ट्रोल वाल्व को बन्द कर दिया जाता है।

●यही विधि एसिटिलीन के लिये भी अपनाई जाती है।

तो दोस्तों आपको मेरी जानकारी कैसी लगी मुझे जरुर कॉमेंट करे।