वेल्डिंग जोड़(welding joints)कितने

प्रकार के होते हैं?

वेल्ड जोड़ों को निम्न भागो में वर्गीकृत किया गया है।

  1.  बट जोड़ (butt joint)
  2. टी जोड़ (T joint)
  3.  लेप जोड़(lap joint)
  4. कॉर्नर जोड़(corner joint)
  5. एज जोड़ (edge joint)

 

बट ज्वाइंट(butt joint) बट जोड़ में जोड़े जाने वाले किनारे आमने सामने रखे जाते हैं।3mm मोटी चादर के किनारों को तिरछा नहीं किया जा सकता।अच्छे फ्यूजन के लिए दोनों किनारों के बीच प्लेट की मोटाई के अनुसार गैप रखा गया है।
अधिक मोटी प्लेट (10mm से अधिक) की बट वेल्डिंग के लिए दोनों तरफ से वेल्डिंग करना चाहिए।किनारों की तैयारी V जोड़ की आसानी से होने के कारण V जोड़ का ही अधिक प्रयोग होता है।परंतु अधिक परिष्कृत जोड़ बनाने के लिए U जोड़ ही बनाए जाते है। बेवाल जोड़ में फिल्टर रॉड का खर्च कम होता है।परन्तु पूरे पेनिट्रेशन की गारंटी नहीं रहती हैं।इसी प्रकार J जोड़ में भी पूरा पेनिट्रेशन नहीं मिलता है।इसके अतिरिक्त U तथा J जोड़ के लिए किनारों का बनाना V जोड़ की तुलना में कठिन होता हैं।

 

T जोड़ (T JOINT) – जब प्लेट के मध्य में कोई दूसरी प्लेट खड़ी अवस्था में जोड़नी हो तो यह टी जोड़ (T joint) बनती है।अधिक मजबूत टी जोड़ के लिए इसको दोनों ओर से वैल्ड करना चाहिए।

 

लेप जोड़ (LAP joint)-जोड़े जाने वाली प्लेटों को एक दूसरे के ऊपर लाकर जोड़ लगाने को लेप जोड़ कहते हैं।सिंगल फिलेट जोड़ अधिक भार में कि स्थिति में नहीं प्रयोग किए जाते है।इस जोड़ का लाभ यह है की इसमें किनारों की तैयारी नहीं की जाती जिस से समय और कीमत दोनों का लाभ होता है।परंतु ये जोड़ देखने में व प्रयोग करने में अच्छे नहीं होते है।

 

कॉर्नर जोड़ (corner joint)- दो प्लेटों के किनारों को आमने सामने के स्थान पर किसी कोण पर आपस में मिलाकर weld किया जाता है।तो इसे कॉर्नर जोड़ (corner joint) कहते हैं।इसमें भी प्लेट के किनारों की तैयारी की आवश्यकता नहीं पड़ती।हल्के व भारी कार्यों के लिए तीन प्रकार के जोड़ बनाए जा सकते हैं।ये जोड़ सस्ते होते हैं।क्युकी इनमें किनारों में ज्यादा work करने की आवश्यकता नहीं पड़ती। फिलर मेटल भी कम खर्च होते है।

 

एज जोड़ (edge joint)- जब दो प्लेट एक दूसरे पर इस प्रकार रखी हो कि उनके जोड़ लगने वाले किनारे एक सीध में हो इन किनारों को एक बिल्डिंग की सहायता से जोड़ दिया जाता है। इसे एक जोड़ कहते हैं। कम पेनिट्रेशन होने के कारण यह जोड़ कमजोर होते हैं। इनमें फिलर मेटल भी बहुत कम लगता है।

 

तो दोस्तो आपको जानकारी कैसी लगी मुझे कमेंट जरूर करें। good day जय हिन्द