Welding cable and lead

 

दोस्तो आपने जब किसी वेल्ड़र को वेल्डिंग करते समय देखा होगा,पर आपने कभी ये सोचा की की वेल्ड़र वेल्डिंग करते समय कौन सा केबिल और लीड़ का प्रयोग करते समय कैसे चयन करते है।तो चलिए मैं आपको बताता हूँ। जब किसी तार में से करंट प्रवाहित किया जाता है।तो उस तार में रेजिस्टेंस के कारण ऊष्मा उत्पन्न होती है।जो I²R के बराबर होती है।केबिल या लीड़ बिजली की विशेष तारें होते है।जो वेल्डिंग ट्रांसफार्मर से इलेक्ट्रोड होल्डर तथा कार्यखण्ड़ को जोड़ती है।इस प्रकार वेल्डिंग करते समय से इलेक्ट्रोड होल्डर,इलेक्ट्रोड आर्क,कार्यखण्ड तथा अर्थ क्लेम्प से होती हुई वापिस ट्रांसफार्मर तक पहुचती है।

वेल्डिंग कार्य में उच्च करंट प्रयोग की जाती है।इन केबिलों की करंट ले जाने की क्षमता काफी होनी चाहिए जिससे कि केबिल के गर्म होने का खतरा न रहे।केबिल अधिक गर्म होने पर मशीन की कार्य कुशलता पर बुरा प्रभाव पड़ता है।केबिल का चयन,प्रयोग की जाने वाली इलेक्ट्रोड की मोटाई तथा कार्यखण्ड की मशीन से दूरी के आधार पर किया जाता है।मोटी इलेक्ट्रोड के लिए अधिक करंट की आवश्यकता रहती है।

अतः केबिल का व्यास भी अधिक रखना पड़ेगा।कार्यखण्ड की दूरी अधिक होने पर भी केबिल का आकार बढाना पड़ेगा। केबिल आमतौर पर सिंगिल कोर की बनायी जाती है।जिसमें बाल की मोटाई के 500 से 3000 तक उच्च कोटि के तांबे के तार होते है।इनमें लचीलापन पैदा करने के लिए पहले कागज तथा उसके ऊपर विशेष रूई के धागो से लपेटा जाता है।अंत में मजबूती देने के लिए इसके ऊपर सख्त रबड़ चढायी जाती है।

 

अच्छी केबिल में निम्न गुण होने चाहिए-

 

(1)केबिल में लचक काफी होनी चाहिए,जिससे वेल्डर आसानी से कार्य कर सके।

(2)केबिल का इंसुलेशन अच्छा और रगड़ सहन करने के योग्य होना चाहिए।

(3)उचित क्षमता की केबिल ही प्रयोग करनी चाहिए,जिससे केबिल अधिक गर्म न हो।

(4)केबिल के जोड़ मजबूती से कसे होने चाहिए जिससे कि स्पार्किंग होने का खतरा न रहे।

तो आपको मेरी दी गई जानकारी कैसी लगी मुझे जरूर कमेंट करे।

 

वेल्डिंग पोजीशन(Welding position)क्या होता है?

 

उच्च दाब वेल्डिंग व निम्न दाब वेल्डिंग क्या है?

 

वेल्डिंग टॉर्च(welding torch)कैसे जलाया जाता है?