Venturimeter(वेन्चुरीमीटर)

 

Venturimeter की सहायता से किसी pipe में बहते हुए द्रव के किसी भी बिंदु पर द्रव की मात्रा की दर(विसर्जन)ज्ञात की जा सकती है।पाइप किसी भी स्थिति में हो सकता है।

Venturimeter के तीन प्रमुख भाग होते है-

अभिसारी शंक्वाकार नली(convergent conical pipe)

कंठ (throat)

अपसारी शंक्वाकार नली(divergent conical pipe)

Venturimeter की बनावट 

 

चित्र में Venturimeter को प्रदर्शित किया गया है,

जिसमे यह दिखाया गया है की अभिसारी नली का बड़े व्यास वाला सिरा मुख्य पाइप से जुड़ा हुआ है।यह सिरा Venturimeter का प्रवेश(inlet)कहलाता है।कंठ से अभिसारी नली का कम व्यास वाला सिरा जुड़ा हुआ है।कंठ एक समान व्यास वाली छोटी नली होती है।इसके दूसरे सिरे से अपसारी नली का कम व्यास वाला सिरा मुख्य पाइप से जुड़ा होता है,तथा अधिक व्यास वाला सिरा मुख्य पाइप से जुड़ा होता है।

कार्य व समीकरण

अभिसारी तथा अपसारी के सिरों के व्यास मुख्य पाइप जोड़ा जाता है अतः इनके बड़े सिरों के व्यास मुख्य पाइप के व्यास के बराबर होते है।इनके छोटे सिरो के व्यास कंठ के व्यास के बराबर होते है।अभिसारी नली में द्रव के प्रवेश करने के बाद द्रव की गति बढ़ जाती है।सातत्य समीकरण से कंठ पर दाब कम हो जाता है।

माना कि अनुप्रस्थ काट 1 पर द्रव के दाब,क्षेत्रफल तथा गति क्रमशः p1,a1 तथा v1 है और अनुप्रस्थ काट 2 पर ये क्रमशः p2,a2 तथा v2 है।माना की विसर्जन Q तथा ρ है।

सामत्य समीकरण से,

Q=a1,v1=a2v2. ……………(1)

Venturimeter की केन्द्र रेखा लेने पर,

P₁⁄ρg − P₂⁄ρg=v₂² ⁄ 2g−v₁²⁄ 2g. ………(2)

लेकिन P₁ ⁄ ρg – P₂ ⁄ ρg = H. …….(3)

समीकरण (1),(2) व (3) से-

Q = a₁a₂ ⁄ √a₁² −√a₂²

= K√H

जहाँ K Venturimeter स्थिरांक है।

यदि Venturimeter में घर्षण आदि हानियों को नगण्य न माना जाय तो विसर्जन का मान वास्तविक विसर्जन से अधिक होता है।अतः इस त्रुटि को दूर करने के लिए एक गुणांक (coefficient of discharge) कहते है,का प्रयोग किया जाता है।इसका मान Venturimeter के व्यास तथा द्रव के वेग पर निर्भर करता है।साधारणतया C का औसत मान 0.97 लिया जाता है ।
विसर्जन की नई समीकरण-

Q=CK√h. ……..(4)

जहाँ h वास्तविक माना गया शीर्ष अंतर है।

तो दोस्तों आपको मेरी दी गई जानकारी कैसी लगी मुझे ज़रूर कमेंट करें।

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