टारबाइन(turbine)क्या है?

 

टारबाइन(turbine)के बारे में और जानेंगे की टारबाइन क्या है तथा कैसे काम करता है।
आप तो जानते ही होंगे कि टारबाइन का उपयोग बिजली का उत्पादन करने के लिए किया जाता है। टारबाइन कई सारे मैकेनिज्म से मिलकर बना होता है।जो एक पूरी तरह से यांत्रिक यंत्र है।यह यंत्र दाब ऊर्जा को घूमाऊ गति में परिवर्तित कर बिजली का उत्पादन करती है।इसका उपयोग ऊर्जा संयंत्र(power plant)जैसे जगहो पर किया जाता है।

टारबाइन(turbine)के प्रकार –

टारबाइन(turbine)मुख्य रूप से चार प्रकार

की होती है-

1.जल टारबाइन

2.वायु टारबाइन

3.भाप टारबाइन

4.गैस टारबाइन

अब हम इन चारो को विस्तार से जानेंगे।

(1)जल टारबाइन – यह सबसे ज्यादा उपयोग में आने वाला टारबाइन है।इस टारबाइन का उपयोग ज्यादातर बड़े नदीयो के किनारे लगे संयंत्रो में किया जाता है।यह जल की गतिज ऊर्जा तथा संभावित ऊर्जा को गतिज ऊर्जा को यंत्रिक ऊर्जा में परिवर्तित करता है।इसमें अधिक दाब के पानी को ब्लेडो के ऊपर छोड़ा जाता है।तो ब्लेड़ अधिक गति से घुमने लगता है।जो गतिज ऊर्जा में बदलने लगता है।जो जनरेटर से विधुत ऊर्जा में परिवर्तित में परिवर्तित कर देता है।

(2)वायु टारबाइन – यह विधुत ऊर्जा बनाने की सबसे आसान विधी है।यह पवन चक्की द्वारा उत्पन्न की जाती है।यह वायु ऊर्जा को विधुत ऊर्जा में परिवर्तित करता है।इसमें तीन या दो ब्लेड़ बराबर में लगी होती है।जो रोटर और शाफ्ट से जुड़ा होता है।जब तेज हवाएँ चलती है।तो विधुत ऊर्जा में परिवर्तित करती है।यह समुद्रीय जगह तथा मैदानी जगहो में ज्यादा उपयोग में होता है।

(3)भाप टारबाइन – इस टारबाइन को चलाने के लिए कोयला का उपयोग किया जाता है।इस टारबाइन को चलाने के लिए कोयला तथा पानी को अत्यधिक ताप में गर्म करके विधुत ऊर्जा में परिवर्तित करता है।इसमें अधिक मात्रा में कोयला तथा पानी की अधिक जरूरत होती है।जब भाप ब्लेड से टकराती है तो रोटर घुमती है।जिसके बाद जनरेटर से विधुत ऊर्जा में परिवर्तित होती है।

(4)गैस टारबाइन – यह एक दहन टारबाइन होती है।यह ब्रेटन चक्र की तरह कार्य करता है।जिसमें वायु तरल रूप में होती है।जहाँ ईधन को दबाव डालकर लगातार उच्च दबाब में डालकर गैस तैयार किया जाता है।जब गैस उत्पन्न होती है।गैस टारबाइन में जाकर प्रवेश करती है।फिर शाफ्ट कार्य में परिवर्तित होती है।गैस टारबाइन में कार्बन डाई आक्साइड तथा कार्बन मोनोआक्साइड़ जैसी गैसे नही होती है।इसलिए यह शुध्द मानी जाती है। यह 250mv से 750mv तक की ऊर्जा उत्पन्न कर सकती है।इस टारबाइन का उपयोग ट्रेन,जहाज जैसी जगहो पर उपयोग में आती है।

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