बैटरी की जांच (testing of

battery)कैसे करे?

प्रति सेल वोल्टेज या इलेक्ट्रोलाइट की स्पेसिफिक ग्रेविटी की जांच करके बैटरी की अवस्था का परीक्षण किया जा सकता है।बैटरी की चार्ज अवस्था से पूर्ण डिस्चार्ज अवस्था तक वोल्टेज बहुत अधिक नही बदलती है।इसलिए बैटरी की अवस्था को ज्ञात करने के लिए हाइड्रोमीटर की सहायता से स्पेसिफिक ग्रेविटी की जांच की जाती है जैसा की पहले वर्णित किया जा चुका है।

केवल स्पेसिफिक ग्रेविटी का मान ही लैड एसिड की आंतरिक अवस्था को नही बता सकता है क्योकि इसे सैल के इलेक्ट्रोलाइट से सान्द्र सल्फ्यूरिक एसिड को डालकर भी बढाया जा सकता है।इसलिए सैल की अवस्था को ज्ञात करने के लिए अधिक करंट पर इसकी वोल्टेज नापी जाती है।वह यंत्र जो इस काम के लिए प्रयोग किया जाता है उसे हाई रेट डिस्चार्ज सैल टेस्टर कहते है।

हाई रेट डिस्चार्ज सैल टेस्टर (high rate discharge cell tester)

High rate cell tester

यह लकडी के हत्थे का बना होता है जिसमे दो धातु की नुकीली पत्ती एक दूसरे के समांतर मे जुड़ी रहती है।उनके बीच कम रेजिस्टेंस का लोड लगा होता है। जिसके सिरो पर एक जीरो सेन्टर का वोल्ट मीटर लगा होता है। जब टेस्टर की नुकीली पत्तियो को बैटरी के प्रत्येक सिरो पर दबाते है तब यह रजिस्टेंस 150 से 300A तक करंट लेता है।प्रत्येक सैल पर पर टैस्टर को 10 सेकण्ड से अधिक नही लगाना चाहिए और प्रत्येक अवस्था मे वोल्ट मीटर की रिडिंग को नोट करना चाहिए।एक बैटरी का पूर्ण चार्जड सैल जब अधिक करंट दे रहा हो तब वोल्टेज 2 V से कम नही होनी चाहिए। यदि यह तेजी से गिरती है,तब यह बताती है की या तो सैल पूर्ण चार्ज नही है या प्लेट सल्फेटेड हो गयी है या प्लेटो का क्रियाशील पदार्थ नीचे गिर गया है।

बैटरी की देखरेख

लेड एसिड बैटरी के बचाव के लिए निम्नलिखित बातो को ध्यान मे रखना चाहिए-

  1. बैटरी को चार्ज पर लगाने से पहले,हमेशा इलेक्ट्रोलाइट को सतह की प्लेटो से 15 mm ऊपर रखना चाहिए।इसके लिए हमेशा सैल मे डिस्टिल वाटर डालना चाहिए।इस उद्देश्य के लिए बने बनाये इलेक्ट्रोलाइट या H2SO4 का प्रयोग कभी नही करना चाहिए
  2. एक बैटरी को चार्ज करते समय हमेशा बैटरी का पाजटिव सिरा सप्लाई के पॉजिटिव सिरे से और बैटरी का निगेटिव सिरा सप्लाई के निगेटिव सिरे से जोड़ना चाहिए
  3. चार्जिंग के समय मुक्त गैसो को निकालने के लिए वेन्ट प्लग को खुला रखना चाहिए।
  4. बैटरी के सिरो को साफ रखना चाहिए। आक्सीकरण से बचाने के लिए उन पर वैसलीन या पेट्रोलियम जेली की पतली परत चढानी चाहिए।
  5. एक बैटरी को लगातार अधिक दर से चार्ज और डिस्चार्ज नही करना चाहिए।
  6. बैटरी को चार महीने के बाद ओवर चार्ज करना चाहिए ताकि इस दौरान प्लेटो पर बने लेड सल्फेट के धब्बो को समाप्त किया जा सके।
  7. बैटरी को 1.8V से नीचे कभी भी डिस्चार्ज नही करना चाहिए अन्यथा लेड सल्फेट के धब्बे अघुलनशील लवण के रूप मे बदल जायेंगे।
  8. डिस्चार्ज के पश्चात जितनी जल्दी हो सके बैटरी को दोबारा चार्ज करना चाहिए।
  9. बैटरी को चार्ज पर लगाने से पहले और बाद मे इलेक्ट्रोलाइट की स्पेसिफिक ग्रेविटी की जांच करनी चाहिए।
  10. यदि बैटरी लम्बे समय से प्रयोग मे नही आ रही हो तब इस ट्रिकल चार्ज पर लगाना चाहिए।

तो दोस्तो आपको जानकारी कैसी लगी मुझे कमेंट जरूर करे।धन्यवाद

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