Steel fabrication क्या है?

आज हम बात करेंगे स्टील फेब्रिकेशन के बारे में जानेंगे कि था किस तरह काम होता है।था किस तरह काम किया जाता है, किस तरह काम करवाया जाता हैं।में इसके बारे में पूरी बात बताऊंगा। सच्चाई से रूबरू करवाऊंगा।तो चलते है आगे बात करते है,देखते हैं। दोस्तो में खुद फेब्रिकेशन स्टील में काम। करता हूं में आपको वहां होने वाले अनुभव को आपके साथ साझा करूंगा।

दोस्तों स्टील फेब्रिकेशन का काम आज पूरे देश में व्यापक मात्रा में होता है।यह धंधा बड़े जोरो से चलता है।स्टील फेब्रिकेशन में आपके दरवाजे से लेकर बड़े बड़े स्ट्रक्चर तक के काम किए जाते है।बोलने के शब्दों में कहूं तो फेब्रिकेशन में लोहे के टुकड़े कर उसे में मुताबिक रूप में तैयार किया जाता है। जिसे उपयोग में लाया जा सके। फेब्रिकेशन में ड्राइंग के हिसाब से काम किया जाता हैं। फेब्रिकेशन के अलग अलग यूनिट होते है। फेब्रिकेशन के मुख्यत: दो प्रकार के होते है।

Lite fabrication industry

Heavy fabrication industry

स्टील फेब्रिकेशन भी अलग अलग प्रकार के होते हैं।

Eraction fabrication

Tower fabrication

Equipment fabrication

तो ये सभी इनके प्रकार है या इनके यूनिट भी कह सकते है।

 

 ERACTION FABRICATION-

यह fabrication को किसी इंडस्ट्री को स्थापित करने के लिए किया जाता है।यह fabrication बाकी फेब्रिकेशन से अलग होता है।इस fabrication में सिविल और मैकेनिकल में  मैन पॉवर की ज्यादा जरूरत होती है।यह fabrication को कम अवधि में पूरा किया जाता है।इसमें इंजिनियर, फिटर, वेल्डर , गैस कटर हेल्फर की जरूरत होती है।इसमें कॉलम को खड़ा करके मुरी कंपनी को तैयार किया जाता है।

TOWER FABRICATION-

यह fabrication बाकी फेब्रिकेशन से अलग है।इसमें सारा काम एंगल का ही होता है।इसमें पंचिंग मशीन, कटिंग मशीन, नोच कटिंग मशीन,stumping machine, बंडिंग भट्टी के साथ कार्य किया जाता है। इसमें रॉ मटेरियल के लिए एंगल की आवश्यकता होती हैं।यह FABRICATION बड़े बड़े बिजली के खंबो तथा मोबाइल के टावरों का फेब्रिकेशन करती है।इसमें FITER की आवश्यकता नहीं होती।सब मशीन ऑपरेटर ही करते है।हा इनके साथ एक सुपरवाइजर जरूर होता है। जो पूरी ऑपरेशन होने के बाद उसे इंस्पेक्शन करता है। जिसके बाद कंप्लीट ब्लैक मटेरियल को glavenized के लिए भेजा जाता हैं।

 

EQUIPMENT FABRICATION-

यह fabrication industry में सबसे बड़ा होता है।इसे heavy fabrication industry के नाम से भी जाना जाता हैं। यहां पर क्वालिटी का पूरा ध्यान रखकर fabricate किया जाता हैं।यह बहुत ही महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। इसमें बड़े बड़े bankar,laddle, railway engine ke चेचिस, गुड्स वैगन, पैसेंजर ट्रेन के डिब्बे,जहाज़,हवाई जहाज,पावर प्लांट के equipment ट्रक, कार आदि के निमार्ण किए जाते हैं।इनकी ड्राइंग बहुत जटिल होती हैं।इनको बनाने के लिए अनु भव की जरूरत होती हैं। इसमें फीटर, वेल्डर, हैल्फर, सुपरवाइजर की जरूरत होती हैं।इनको फब्रिकेट करने में महीनों लग जाते हैं। इनको इंस्पेक्शन करने के लिए जो कंपनी ऑर्डर देती है। उन्हीं के इंजिनियर फाइनल चैक करने आते है।

दोस्तों ये तो थे fabrication के कुछ अंग जो मैने अपको बताया इनमें कमाई करोड़ों और लाखो में होती है।आप अगर कोई fabrication का काम चालू करना चाहते है तो आप बेशक चालू कर सकते है।लेकिन इन सब की कंपनी स्थापित करने के लिए आपको उतने पैसे भी खर्चे करने पड़ सकते हैं।आपको भी fabrication की नॉलेज अच्छी होनी चाहिए।

एक fabrication company banane ke लिए आपको वेल्डिंग मशीन, कटिंग मशीन, इंस्पेक्शन करने के लिए सारे equipment और बहुत से electrical or mechanical चीजो ki जरूरत होती है।

कैसे काम होता हैं fabrication industry में-

 

दोस्तों fabrication company में पहले तो जिस कंपनी को कोई जॉब(fabrication items) बनवाना होता है तो वो जहां ऑर्डर देना होता है बनवाने का वहा जाते है।उस कंपनी के बारे में जानकारी लेंगे उस कंपनी के GM से वो कंपनी का मुआयना करेंगे देखेगे की वो यह कंपनी बना सकती है या नहीं उसके बाद अगर वो कंपनी उनके हिसाब से फिट बैठ जाती है।तो उनको जॉब बनाने वाली कंपनी ड्राइंग मुहिया करवाती है।फिर उनको रॉ मटेरियल भेजा जाता है। फिर उस raw material का मेटरियाल टेस्टिंग किया जाता है।

अब जिस कंपनी को fabrication करना है वो अपने कुशल इंजिनियर से प्लानिंग करवाती है। जिसके बाद fabrication company के ठेकेदारों को ड्राइंग सौंप दी जाती हैं। और fabrication का काम चालू किया जाता हैं।जब जॉब बनकर तैयार हो जाता है।तो जिस कंपनी ने ऑर्डर दिया हैं। उस कंपनी को बुलाया जाता है कि आकर अपना जॉब चैक कर ले।फिर जिस कंपनी ने ऑर्डर दिया है वो अपने क्वालिटी इंजिनियर को भेजती है।वो अगर जॉब में ड्राइंग के हिसाब से गड़बड़ी नहीं पाते तो वो जॉब को पेंटिंग करने के लिए भेज देंगे।अगर ड्राइंग के हिसाब से थोड़ी सी भी गड़बड़ी होती है तो उनको सुधारा जाता है।

इसमें तीन शिफ्टों में काम होता है।

उच्च दाब वेल्डिंग व निम्न दाब वेल्डिंग क्या है?

वेल्डिंग जोड़(welding joints) कितने प्रकार के होते हैं?

संचार व्यवस्था(Communication arrangement क्या है?

तो दोस्तों आपको मेरी जानकारी कैसी लगी जरूर कमेंट करे।