Shaper machine

 

Shaper machine एक प्रकार का resiprocating machine tool है।जिसके द्वारा फ्लैट सरफेस को बनाया जाता है।यह सरफेस समतल,लम्बवत् या किसी कोण में भी बनाई जा सकती है।इससे सीधे स्लॉट या ग्रुव भी काटे जाते है।इसमें टूल फारवर्ड स्ट्रोक में धातु कटता है।

साइज

जितनी अधिक लम्बाई का कट काटना होता है।किसी जाॅब में उतना ही बड़ा साइज का shaper उपयोग में लिया जाता है।इसकी रेंज 175 से 900 मि.मी तक होती है।मान लिया जाए की किसी shaper का साइज 350 मि.मी है तो shaper का रैम 350 मि.मी लम्बाई में चलेगा,टेबल पर 350 मि.मी में क्रास फीड ली जा सकती है।और क्रास रेल पर टेबल भी 350 मि.मी नीचे तक जा सकता है।

 

इसकी बनावट

 

Shaper की बनावट में निम्नलिखित मुख्य पार्टस होते है-

 

1)बेस(base)

2)टेबल(table)

3)रैम(ram)

4)टूल हैड़(tool head)

5)क्रास रेल(cross rail)

 

Shaper के प्रकार

 

यह निम्नलिखित प्रकार के होते है-

 

1.क्रेंक शेपर(crank shaper)

इसको स्टैंडर्ड shaper भी कहा जाता है।इस प्रकार का shaper वर्कशाप में सबसे ज्यादा प्रयोग में लाया जाता है।इसमें रैम को एक राॅकर फ्रेम के द्वारा आगे पीछे चाल दी जाती है।राॅकर फ्रेम को बुल गियर के साथ एक क्रेंक पिन के द्वारा जोड़कर चलाया जाता है।इसके रैम के साथ फाइन फीड मैकेनिज्म भी लगा रहता है।जिसमें क्लैपर बाक्स के साथ टूल भी पकड़ा जा सकता है।

2.गियर्ड शेपर(geared shaper)

इस प्रकार के शेपर में रैम को रैक और पिनियन के द्वारा आगे पीछे चाल दी जाती है।रैम के दाॅते रैम के बिल्कुल नीचे बने होते है।रैम के साथ एक पिनियन को मेश कर दिया जाता है।पिनियन को एक गियर ट्रेन से चाल दी जाती है।इस प्रकार के shaper कम प्रयोग में लाई जाती है।

 

3.हाइड्रोलिक शेपर(hydraulic shaper)

इस प्रकार के शेपर में रैम को आगे पीछे की चाल हाइड्रोलिक पाॅवर से दी जाती है।इसमें एक सिलिंडर होता है जिसमें पिस्टन को फिट कर दिया जाता है और तेल को पिस्टन के द्वारा पम्प किया जाता है।जिससे उसे आगे पीछे की चाल मिलती है।इस शेपर को चलाने पर कम होती है।इसकी कटिंग स्पीड़ और रैम का फोर्स शुरू से अंत तक एक जैसा रहता है।

 

सामान्य प्रकार के शेपर के कार्य

 

1.हाॅरिजान्टल कटिंग (horizontal cutting)

इस कार्य क्रिया में मशीन वाइस के जास को शेपर मशीन के रैम के समानांतर सेट करने के बाद जाॅब को वाइस में टूल के स्ट्रोक के समानांतर बांधना चाहिए। इसके बाद रैम के स्ट्रोक की लम्बाई को सेट करना चाहिए।यदि कास्ट आयरन को शेपिंग करना हो तो टूल को लगभग 45° के कोण में सेट करते है।जिससे कार्य क्रिया करते समय जाॅब के किनारे खराब नही होने पाते है।कास्ट आयरन को शेपिंग करते समय पहला कट अधिक गहरा लगाना चाहिए जिससे टूल के कटिंग ऐज को खराब होने से बचाया जा सकता है।क्योकी कास्ट आयरन की ऊपरी सरफेस प्रायः हार्ड होती है।इस कार्य क्रिया से प्लेन हारिजाॅन्टल सरफेस बनाई जाती है।

 

2.वर्टिकल कटिंग (vertical cutting)

 

इस प्रकार की कार्य क्रिया किसी जाॅब की समकोण वाली भुजाओ के बनाने के लिए की जाती है।इससे चाबी घाट और ग्रुव आदि भी बनाए जाते है।इसमें टूल को डाउन फीड हैंडल से फीड दी जाती है।कटिंग आफ करने के लिए या 6 मिमी तक की छोटी गहराई के ग्रुव बनाने के लिए टूल को बिल्कुल लम्बवत फिट किया जाता है।इसके अतिरिक्त समकोण वाली भुजाएं बनाने के लिए टूल को थोड़ा सा कोण में सेट किया जाता है।इस प्रकार की कटिंग ऊपर से नीचे की ओर की जाती है।

 

3.ऐंगुलर कटिंग (anguler cutting)

 

कोण वाली सरफेस और डावटेल ग्रुव प्रायः शेपर के हैड़ को निश्चित कोण में घुमाकर कटिंग की जाती है।कभी कभी जाॅब को वाइस में निश्चित कोण में बांधकर भी कोण वाली सरफेस को बनाया जा सकता है।

 

Shaper की स्पीड़ और फीड़

 

स्पीड़(speed)-शेपर का रैम प्रति मिनट में जितनी बार आगे पीछे चलता है अथार्त स्ट्रोक लगाता है।उसे शेपर की स्पीड़ कहते है।

कटिंग स्पीड़ – शेपर के टूल के द्वारा प्रति मिनट में काटी गई धातु को यदि मीटर या फुट में माप लिया जाए तो वह शेपर की कटिंग स्पीड़ होती है।विभिन्न पध्दतियों में इसको निम्नलिखित सूत्रों द्वारा ज्ञात किया जाता है।

मीट्रिक पद्दति

C.S =N×L(1+K)/1000

जहाँ पर
N=रैम स्ट्रोक की संख्या
L=रैम के स्ट्रोक की लम्बाई मिमी में
K=वापसी समय से कटिंग करने वाले समय का अनुपात

इंग्लिश पद्दति

C.S = N×L(1+K)/12

जहाँ पर
N=रैम स्ट्रोक की संख्या
L=रैम के स्ट्रोक की लम्बाई इंचो में
K=वापसी समय से कटिंग करने वाले समय का अनुपात।

 

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