Shaft,key,coupling

Shaft,key,coupling

शाफ्ट(shaft) – मशीन का वह अंग जो उसके घूमने वाले भागों को सहारता है।तथा मरोड़ घूर्ण भी पारेषित करती है।सभी शाफ्टों को दो भागों में बांटा जा सकता है।

 

(1)मशीन शाफ्ट (2)पारेषण शाफ्ट

 

वे शाफ्ट जो शक्ति जो शक्ति स्त्रोत से मशीन को शक्ति स्त्रोत से मशीन को शक्ति पारेषित करने के काम आती है,पारेषण शाफ्ट कही जाती है।इन शाफ्ट पर पुलियां,गियर तथा स्प्रोकेट आदि लगे रहते है।जैसे – कांउटर शाफ्ट,लाइन शाफ्ट,ओवर-हैड शाफ्ट इत्यादि जबकि मशीन शाफ्ट मशीनी भागों का ही अंग होता हो।जैसे – इंजन,क्रेंक,शाफ्ट इत्यादि।

लचकदार शाफ्ट जो आसानी से मुंड़ सकते है,हैड़-ड्रिल,ग्राइडिंग व्हील आदि प्रयोग किये जाते है।

स्पिन्डल भी छोटे आकार की शाफ्ट है जो किसी मशीन औजार में औजारों चक या कार्य को घुमाऊ गति प्रदान करती है।जैसे – खराद मशीन का स्पिन्डल,ड्रिल मशीन मशीन स्पिन्डल आदि।

धुरा घुमाने वाले अंगो को केवल सहारता है और अपनी आलम्बों के सापेक्ष स्थिर अथवा अंग के साथ घूमने वाला होता है।इस पर मूल रूप से नमन घूर्ण कार्य करता है।

शाफ्ट समान्यतः नरम इस्पात व कार्बन इस्पात की ठोस अथवा खोखली वृताकार काट की बनी होती है।शाफ्ट 25 मि.मी से 500 मि.मी व्यास की तथा अधिकतम लम्बाई 7 मी. तक रखी जाती है।शक्ति पारेषण के कारण शाफ्ट पर मरोड़ घूर्ण कार्य करता है।जिससे उसमें कर्तन प्रतिबल पैदा होते है।इन शाफ्ट पर,शाफ्ट के अपने भार तथा उस पर लगे अन्य अंगों के भार के कारण नमन प्रतिबल भी कार्य करता है।

शाफ्ट की डिजाइन के लिए तनाव प्रतिबल 60 – 80 N/mm² ,संपीडन प्रतिबल 70 -100 N/mm² ,कर्तन प्रतिबल 35-50 N/mm² ली जाती है।

 

की (key)

 

की (key) धातु के टुकड़ा होते है।जो पुली,फ्लाई व्हील ,क्रैंक आदि को शाफ्ट से मजबूती से बांधे रखने के लिए प्रयोग किये जाते है।ताकि शाफ्ट तथा उसके अंगो के बीच सापेक्ष गति न हो।key सापेक्ष शाफ्ट तथा हब में ग्रुव जिसे keyway कहते है।उसमें फसा दी जाती है।विभिन्न प्रकार key होती है।जैसे – वर्गाकार, आयताकार,सैडल,संक,जिब हैड,फैदर,पिन तथा वुडरफ -की आदि।

चपटी की(flat key) शाफ्ट पर बनी चपटी सतह पर लगाई जाती है।इसके लिए keywaykeyway की आवश्यकता नही है।संक की सबसे समान्य प्रकार की key है।जो आयताकार या वर्गाकार काट की हो सकती है।key का आधा भाग शाफ्ट में तथा आधा भाग पुली के हब में डूबा रहता है।

हब के भीतरी सतह पर बने splines में शाफ्ट के साथ बने spline एक key की भाँति कार्य करते है।इस प्रकार splines को गियर बाक्स में shifting gears को क्लच में चलित प्लेंटो को लगाने के लिए साधारणतः प्रयोग किया जाता है।key डिजाइन करने के लिए सामान्यतः पहले उसकी मापें ज्ञात की जाती है।फिर उन मापों की सहायता से उसमें उपजे प्रतिबलों का परीक्षण किया जाता है।

 

 

कपलिंग(coupling)

 

Coupling का प्रयोग अलग-अलग मशीनों की शाफ्टों अथार्त चालक व चलित शाफ्टों को जोड़ने तथा दो छोटी शाफ्टों को जोड़ने के लिए किया जाता है।इस प्रकार जोड़ी गई शाफ्टें एक संयुक्त ईकाई का कार्य करती है।प्रायः दो प्रकार की coupling होती है।

 

 

(1)दृढ कपलिंग (rigid coupling)

 

(2)लचीली कपलिंग (flexible coupling)

 

जब दो शाफ्टों को जोड़ना होता है।जो पूर्णतया अक्षीय तथा कोणीय सीध में हो तो दृढ कपलिंग(rigid coupling)का प्रयोग किया जाता है।

जब दोनों जोड़ी जाने वाली शाफ्टों की अक्ष भिन्न अक्षों पर भिन्न कोणों पर होती है।तो लचीली कपलिंग(flexible coupling)प्रयोग में लाई जाती है।दृढ कपलिंग को पुनः विभाजित किया जा सकता है,जैसे बाक्स या मफ,स्पिलिट या क्लेम्प मफ ,फ्लेंज।
इसी प्रकार flexible coupling भी कई प्रकार की होती है।जैसे पिन ब्रुश प्रकार,डिस्क पैड प्रकार,clawclutch,कोन घर्षण क्लच,ओल्डहम तथा युनिवर्सल कपलिंग व युनिवर्सल जोड़ तथा hydraulic coupling आदि।

 

 

मफ कपलिंग (muff coupling)

 

 

मफ कपलिंग(muff coupling) में स्लीव या बाक्स दो शाफ्टों के ऊपर फिट करके या तो एक की के द्वारा अथवा एक पिन के द्वारा जोड़े दिया जाता है।दुसरे प्रकार के मफ कपलिंग में मफ दो हिस्सो में जोड़ जोने वाले शाफ्टों के ऊपर बोल्ट व नट की सहायता से क्लेम्प कर दिया जाता है।

 

 

फ्लेंज कपलिंग (flange coupling)

 

फ्लेंज कपलिंग में दो शाफ्टों पर फ्लेंज बल द्वारा फिट करके key फंसा दी जाती है।तथा फिर फ्लेंजों को बोल्ट की सहायता से जोड़ दिया जाता है।फ्लेंजो में बोल्ट बाहर की तरफ निकले हुए अथवा अंदर की तरफ हो सकते है।
इस प्रकार की कपलिंग कम गति पर अधिक भार पारेषित करने के लिए प्रयोग लाई जाती है।फ्लेंजो को ढाल कर मशीनन क्रिया कर दी जाती है।इस कपलिंग को जोड़ना तथा अलग करना आसान है।

 

अन्य

 

जोड़े जाने वाले शाफ्टों की अक्ष एक सीध में नही होती है।अर्थात दोनो के बीच संरेखन सुनिश्चित नही किया जा सकता है अथवा जहाँ या तो चालन अथवा मशीन में यकायक अस्थिरता होना संभावित है।वहाँ लचीली कपलिंग उपयोग की जाती है।रबड़ अथवा चमड़े के ब्रुश पिनों के ऊपर प्रयोग किये जाते है।कपलिंग के दो अर्ध भागों के बीच कोई दृढ संयोजक नही होता चालन संपीडिय रबड़ अथवा चमड़े के बुशो के माध्यम से कार्य करता है।

 

ओल्डहम कपलिंग (oldham coupling)

यह एक प्रकार की लचीली कपलिंग होती है।इसका प्रयोग ऐसे शाफ्टों को जोड़ने में किया जाता है।जिसकी अक्ष समानांतर है परन्तु एक सीध में रहना संभावित नही है।यह दो अर्धभागों में होती है।जिनमें अलग-अलग दो जोड़े जाने वाले शाफ्ट फिट होते हो।अर्धभागों में से एक अर्ध भाग को आगे निकाला भाग जिसे tongue कहते है।दुसरे अर्ध भाग के परस्पर लम्बवत् slot में सरका कर फिट कर दिया जाता है।इस प्रकार से संयुक्त ईकाई रूप में शक्ति पारेषित करते है।इसके द्वारा 5 मि.मी की eccentricity अनुमत है।
कपलिंग के डिजाइन के अंतर्गत key का असफल होना,फ्लेंज का हब से जोड़ पर कर्तन में असफल होना तथा बोल्टों का कर्तन में असफल होना आदि बातो पर विचार किया जाता है।

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