SAW और TIG welding

SAW welding

इसका मतलब है डूबा हुआ।अथार्त SAWwelding में आर्क पूरी तरह से वेल्डिंग के flux में डूबा रहता है।आर्क,काॅपर कोटेड़ इलेक्ट्रोड और बैस मैटल की बनी होती है।एक हाॅपर के द्वारा फ्लक्स पहले से ही बैस मैटल पर बिछता चला जाता है।यह वेल्डिंग करने की एक सेमी आटो मेटीक प्रक्रिया है।आर्क बनने से इलेक्ट्रोड और बैस मैटल पिघलते है साथ ही कुछ फ्लक्स भी पिघलकर वैल्ड़ बीड़ के ऊपर एक सुरक्षात्मक कवर बना लेते है।आर्क स्टील बूल या फ्रीक्वैंसी देकर शूरू की जाती है।फिलर वायर एक स्पूल के रूप में रहती है।इसको बीड की मोटाईके अनुसार कम या अधिक गति पर फीड रोलरो की सहायता से जोड़ में फीड़ किया जाता है।इसके निम्न भाग होते है।

1.पावर सोर्स

2.कन्ट्रोल यूनिट

3.वायर स्पूल

4.वायर फीडिंग डिवाइस

5.फ्लक्स हाॅपर

SAW welding के मुख्य भाग होते है-

1)आर्क,वैल्ड मैटल,वैल्ड पूल तथा वेल्डिंग बीड़ पूरी तरह से फ्लक्स से ढकी होने के कारण स्पैटरिंग बिल्कुल समाप्त हो जाती है।

2)फ्लक्स की मात्रा अत्यधिक रहने के कारण वैल्ड बीड़ भली प्रकार से फ्लक्स की स्लैग से ढक जाती है।इससे बीड़ वायुमंडल की आक्सीजन व नाइट्रोजन से पूर्ण रूप से सुरक्षित हो जाती है।

3)ऊष्मा का वायुमंडल में विक्षेपण ना हो पाने से अच्छा पैनीट्रेशन प्राप्त होता है।

4)इस विधी द्वारा आसानी से अलायिंग एलीमैन्टस को वैल्ड मैटल में मिलाया जाता है।

5)ठंडा होने पर स्लैग की परत अपने आप उतर जाती है।तथा बचा हुआ फ्लक्स वापस हाॅपर में पहुँचा दिया जाता है।

 

उपयोगिता

 

1)साधारणतः तथा इस विधी का प्रयोग फ्लैट पोजीशन में वैल्ड करने के लिये किया जाता है।परन्तु इसके पाइप और फिलेट भी सफलतापूर्वक जोडे जाते है।

2)इसके द्वारा लो एलाॅय स्टील,लो कार्बन स्टील,स्टेनलैस स्टील आदि आसानी से वैल्ड किये जा सकते है,परन्तु हाई एलाॅय स्टील को वैल्ड करने से पहले गर्म करना होता है।और धीरे-धीरे ठंडा करना पड़ता है।

3)वैल्ड की जाने वाली प्लेट की मोटाईके आधार पर वेल्डिंग की गति 0.5 मी./मिनट से 5 मीटर/ मिनट तक हो सकती है।

 

TIG welding

TIG welding 1940 में इन्डस्ट्रीज में काफी प्रचलित हुई।इसे उस समय GTAW मतलब Gas tungsten arc welding के नाम से जाना जाता है।प्रारंभ में यह एल्युमीनियम और मैग्नीशियम अलाॅय ही वैल्ड कर सकती थी।परन्तु इसके बाद इससे सभी मेटल वैल्ड किये जाने लगे।इसमे एक नाॅन कन्जूमेबिल इलेक्ट्रोड टंगस्टन मैटल होता है।जो एक विशेष इलेक्ट्रोड होल्डर में लगा होता है।इसी इलेक्ट्रोड होल्डर से एक इनर्ट गैस आती है,जो इलेक्ट्रोड तथा वैल्ड मैटल को सुरक्षात्मक आवरण प्रदान करती है।इससे वायुमंडल में उपस्थित आक्सीजन तथा नाइट्रोजन इलेक्ट्रोड मैटल पर अपना कोई दुष्प्रभाव नही छोड़ पाती।

TIG welding में DC तथा AC दोनो पावर प्रयोग की जाती है।जब DC प्रयोग करते है तो इलेक्ट्रोड को हमेशा कथोड़ बनाते है।इलेक्ट्रोड का व्यास 0.5 mm से 6.5 mm तक रहता है।तथा करंट 5 amp से 650 amp तक रहता है।100 amp तक की TIG welding gun को केवल हवा द्वारा ठंडा रखा जाता है।परंतु 100 amp से अधिक की करंट पर पानी द्वारा ठंडा करने का प्रबंध किया जाता है।फिलर मैटल के रूप में एक अलग से राॅड को आर्क से अंदर गलाया जाता है।जो बेस मैटल के साथ मिलकर वैल्ड मैटल बनाता है।इस विधी में फ्लक्स के स्थान पर इनर्ट गैस द्वारा शील्डींग कि जाती है।इनर्ट गैस में आर्गन तथा हिलीयम गैस का उपयोग किया जाता है।आर्गन गैस भारी होती है।तथा इसे नियंत्रित रखना आसान होता है।कभी-कभार आर्गन व हीलीयम दोनो को मिलाकर प्रयोग किया जाता है।

 

1) पावर यूनिट

2)शील्डिंग गैस

3)वाटर सप्लाई यूनिट

4)वेल्डिंग टॉर्च

 

1)पावर यूनिट – TIG welding में पावर यूनिट के रूप में D.C तथा A.C किसी भी मशीन को वेल्डिंग मशीन के रूप में प्रयोग किया जाता है।एल्युमीनियम तथा मैग्नीशियम धातु तथा उनके अलाॅय की वेल्डिंग के लिये A.C मशीने प्रयोग की जाती है।जबकि अन्य धातुओ के लिए D.C मशीन प्रयोग की जाती है।D.C मशीन प्रयोग करने पर इलेक्ट्रोड को कैथोड़ (-ve) बनाया जाता है।

 

2)शील्डिंग गैस – वैल्ड मैटल को वायुमंडल प्रभाव से बचाने के लिए शील्डिंग गैसों की आवश्यकता रहती है।इसमें भी बेयर इलेक्ट्रोड प्रयोग किया जाता है।शील्डिंग गैसों के रूप में इनर्ट गैसों जैसे -आर्गन,हीलीयम आदि का प्रयोग किया जाता है।इनर्ट गैसों के सिलेंडरों को नीले रंग से पेंट किया जाता है।सिलेंडर के ऊपर रेग्युलेटर का प्रयोग कर गैस सप्लाई को कंट्रोल में रखा जाता है।

 

3)वाॅटर सप्लाई यूनिट – 100amp से अधिक करंट प्रयोग करने पर टार्च को ठंडा करने की आवश्यकता बढ जाती है।इसके लिए टार्च के अंदर से होकर पानी को फ्लो किया जाता है।यह यूनिट इसी कार्य को अंजाम देती है।

 

4)वेल्डिंग टार्च – इसमें टंगस्टन इलेक्ट्रोड को पकड़ने के लिये एक कालेट लगा होता है।साथ ही शील्डिंग गैस के फ्लो के लिए तथा कुलिंग वाटर के फ्लो के लिये भी रास्ते बने होते है।जब करंट कम होती है तो टार्च एयर कूल्ड होती है।

 

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