Radiation(विकिरण)

 

Radiation उष्मा स्थानांतरण का वह प्रक्रम है जिसमें उष्मा गरम पिंड से ठंडे पिंड की ओर सीधी चली जाती है।इस प्रक्रिया में दोनों पिंडो के बीच के माध्यम की आवश्यकता नही होती है।और यदि कोई माध्यम होता भी हैतो वह प्रभावित नही होता है और उष्मा उसे गर्म नही करती है।सूर्य से उष्मा पृथ्वी तक विकिरण के द्वारा संचरित उष्मा विकिरणी उष्मा कहलाती है।इस उष्मा को उष्मा विकिरण भी कहते है।

 

विकिरण ऊर्जा

 

विकिरण द्वारा उष्मा स्थानांतरण को समझने के लिए यह माना जाता है।कि प्रत्येक वस्तु प्रत्येक समय में ऊर्जा का सतत् रूप से उत्सर्जन करती रहती है।यह ऊर्जा विकिरण ऊर्जा या उष्मीय विकिरण कहलाती है।यह विधुत चुम्बकीय तरंगो के रूप में होती है।ये तरंगे प्रकाश प्रकाश की गति से चलती है और ये निर्वात या किसी माध्यम जैसे – हवा मे से संचरित होती है।जब जब ये तरंगे किसी वस्तु पर पड़ती है जो इनके लिए पारदर्शी नही है तो ये अवशोषित हो जाती है और इनकी ऊर्जा ऊष्मा में परिवर्तित हो जाती है।
किसी पिंड द्वारा उत्सर्जित तापीय विकिरण(उष्मीय विकिरण)प्रति ईकाई समय और प्रति ईकाई पृष्ठ क्षेत्रफल,उसकी पृष्ठ की प्रकृति और उसके ताप पर निर्भर करती है।निम्न ताप पर उत्सर्जन की दर कम होती है।ताप बढाने पर उत्सर्जन दर ताप के चतुर्थ धात T⁴ के अनुपात में बढने लगती है।

 

विकिरण ऊर्जा के गुण

 

तापीय विकिरण निर्वात में सिधी रेखा में प्रकाश के वेग से चलती है।यह व्युत्क्रम वर्ग के नियम का पालन करती है।यह प्रकाश की भांति परावर्तित तथा अपवर्तित होती है।जिस सतह पर ये गिरते है उन पर ये एक कम लेकिन परिमित दाब लगाती है।

 

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