ग्रह(planet)

 

ग्रह(planet) सूर्य के चारों ओर चक्कर लगाते है।इनका अपना दिर्घ वित्तीय मार्ग होता है।जिसे कक्ष कहते है।अपनी अक्ष के चारों ओर गति करने को घूर्णन तथा सूर्य के चारों ओर गति को परिक्रमा कहते है।इनकी अपनी चाल होती है।ग्रह जैसे तारे,इनका अपना कोई प्रकाश और ताप नही होता है।ये (तारें)सूर्य की चमक से चमकते है।जहाँ ग्रह नही होते है,वहाँ तारे टिमटिमाते रहते है।ग्रह के लिए प्रयुक्त होने वाला अंग्रेजी शब्द planet ग्रीक शब्द plantes से बना है।जिसका अर्थ घुम्मकड़ है।अतः ग्रह सतत् गतिशीलता या अपनी स्थिति में बदलाव के प्रतीक है।

 

1.आंतरिक ग्रह या पार्थिव ग्रह

 

आंतरिक ग्रह में बुध,शुक्र,पृथ्वी व मंगल को शामिल किया जाता है।आंतरिक ग्रह अपेक्षाकृत छोटे और अधिक घने होते है।इनमें पृथ्वी सबसे बड़ी और घनी है।सभी आंतरिक ग्रह चट्टानों व धातुओं से बने है।इन्हे पार्थिव ग्रह भी कहा जाता है।क्योंकि ये पृथ्वी के सदृश्य है।आंतरिक ग्रहों के अंतर्गत, बुध,शुक्र, पृथ्वी तथा मंगल ग्रह आते है।

 

(i)बुध(mercury)

 

यह सूर्य का सबसे निकटतम ग्रह है।यह सौरमंडल का सबसे छोटे ग्रह है।यह आकार में पृथ्वी के उपग्रह चंन्द्रमा से थोड़ा बड़ा है।बुध,सूर्य के चारों ओर 88 दिनों में तथा अपनी अक्ष में 59 दिनों में चक्कर लगाता है।इसका कोई उपग्रह नही है।
बुध पर कोई वातावरण नही है।बुध की सतह चट्टानीय तथा पर्वतीय है।इसकी एक सतह सूर्य से अधिकतम प्रकाश तथा ताप ग्रहण करती है।तथा इसकी दूसरी सतह सूर्य से ताप तथा प्रकाश ग्रहण नही करती है।बुध का एक हिस्सा बहुत गर्म तथा दूसरा हिस्सा बहुत ठंडा होता है।इसका गुरुत्वाकर्षण पृथ्वी का 3/8 वाॅ भाग है।
क्योकी बुध,सूर्य के सबसे निकटतम है।इसलिए इसका निरिक्षण बहुत कठीन है।यह सूर्य की चमक से बहुत समय तक छिपा रहता है।इसलिए यह सितम्बर और अक्टूबर में सूर्य के उगने से पहले जैसे सुबह का तारा में दिखाई देता है।यह पश्चिमी क्षेत्र में सूर्य छिपने के बाद जैसे सांझ का तारा में दिखाई देता है।

 

(ii)शुक्र(venus)

 

शुक्र का अपना कोई उपग्रह नही है।यह अपने ध्रुव के चारों ओर पूर्व से पश्चिम की ओर गति करता है।शुक्र देखने में चन्द्रमा की तरह है।यह आकार और भार में पृथ्वी के बराबर है।शुक्र का द्रव्यमान पृथ्वी का 4/5 गुना होता है।इसे सूर्य के चक्कर लगाने में 243 दिन लगते है।शुक्र के वातावरण में CO2 उपस्थित होती है।आक्सीजन और जलवाष्प की बहुत कम मात्रा शुक्र में पायी जाती है।सूर्य के प्रकाश का 3/4 भाग शुक्र के धुंधले वातावरण पर पड़ता है।यह इसलिए है।क्योकि शुक्र ग्रह आकाश में सूर्य और चन्द्रमा के बाद चमकीला दिखाई देता है।
कभी – कभी शुक्र ग्रह सूर्य उगने से पहले पूर्वी आकाश में दिखाई देता है।और कभी – कभी यह सूर्य छिपने के बाद पश्चिमी आकाश में दिखाई देता है।इसलिए यह प्रातः और रात्रि तारा कहलाता है।

 

 

(iii)पृथ्वी(earth)

 

हमारी पृथ्वी पश्चिमी से पूर्व की ओर अपने ध्रुव पर 1610 किमी/घंटा की चाल से चक्कर लगाती है।इसे एक चक्कर लगाने में 23 घंटे 56 मिनट 4.09 सेकण्ड लगते है।पृथ्वी अपने अक्ष से 23° 26’59” आक्षांश झुकी हुई है।पृथ्वी के यही ध्रुव पर घूर्णन के परिणामस्वरूप दिन-रात होते है।हमारी पृथ्वी पश्चिम से पूर्व की ओर घूमती है।हमारी पृथ्वी ज्यादा या हल्की सी गोल है।तथा यह उत्तर से दक्षिण की ओर हल्की सी चपटी है।पृथ्वी के ध्रुवो के हल्के से चपटे होने के कारण पृथ्वी की आकृति को गोलांश कहा जाता है।
पृथ्वी के सबसे निकटतम शुक्र ग्रह है।आकार में इसका 5 वाॅ स्थान है आकार व संरचना में पृथ्वी लगभग शुक्र के समान है।पानी और स्थलीय घासों के कारण पृथ्वी अंतरिक्ष से नीली हरी दिखाई देती है।इसलिए इसे निला ग्रह भी कहते है।
पृथ्वी का द्रव्यमान और घनत्व क्रमशः 5.97 × 10²⁴ और 5.52 ग्राम/सेमी³ है।पृथ्वी सूर्य का एक चक्कर लगाने में 365 दिन 48 मिनट और 45.51 सेकण्ड़ का समय लेती है।तथा सूर्य के चारों ओर 107160 किमी/घंटा की चाल से घूमती है।यह अपनी कक्ष में 661/2° आक्षांश से सूर्य के चारों ओर दिर्घ वृत्ताकार कक्षा में गति करती है।आंतरिक रूप से,पृथ्वी का संघटन सियाल(सिलिका + एल्युमीनियम),सिमा (सिलिका + मैग्नीशियम),निफे (निकिल + आयरन आई) से हुआ है।इसकी सतह एक चादर की तरह गैसों से ढकी है जिसे हवा कहते है।
केवल पृथ्वी ऐसा ग्रह है।जहाँ कुछ विशेष वातावरणीय शर्ते जीवन को लगातार जिवित रखने के लिए उत्तरदायी है।ये सूर्य से सीधी दिशा में है।इसलिए यह सीधी तापीय सीमा जो ओजोन की परत से पार होकर पानी,मिट्टी,खनिज,उपयुक्त वातावरण में आती है।

 

हमारा केवल प्राकृतिक उपग्रह- चंद्रमा(moon)

 

छोटे पिंड का बड़े पिंड के चारों ओर घूमना उपग्रह कहलाता है।चंद्रमा,पृथ्वी के चारो ओर सूर्य के चारों चक्रण करने पर तथा सूर्य से संबंधित होने पर दिन और रात में परिवर्तन होता है।इसके परिणामस्वरूप चंद्रमा की संबंधित स्थितियों में प्रतिदिन परिवर्तन होता है।जैसे चंद्रमा प्रत्येक रात अलग दिखाई देता है।चंद्रमा पृथ्वी के चारों ओर 27 दिन और 7 घंटे में और इतने ही समय में अपनी धुरी पर चक्कर लगाता है।इसलिए हमारी पृथ्वी से इसकी एक ही सतह दिखाई देती है।चंद्रमा पर कोई वातावरण नही है।इस पर पानी भी नही है।चंद्रमा का व्यास पृथ्वी का 1/4 गुना है।चंद्रमा,पृथ्वी से लगभग 384400 किमी दूर है।प्रकाश चंद्रमा से परिवर्तित होकर हमारे पास केवल 1 या 1/4 सेकण्ड़ में पहुचता है।एडविन एवड्रेन,नील आर्मस्ट्रांग तथा कोलिन पहली बार 21 जुलाई 1969 को चंद्रमा पर पहुंचे थे।उन्होनें चंद्रमा की सतह को धूल भरा तथा बंजर पाया।वहाँ विभिन्न आकार के बहुत से अटर है।चंद्रमा पर बड़ी संख्या में पठार तथा ऊँचे पर्वत है।ये चंद्रमा की सतह पर छाया डालते है।

पूर्ण चंद्रमा के दिन में – पृथ्वी,चंद्रमा और सूर्य के बीच होती है।इसलिए हमें चंद्रमा की पूरी सतह दिखाई देती है।

नए चंद्रमा के दिन में – चंद्रमा,पृथ्वी और सूर्य के बीच होता है।इसलिए सूर्य की रोशनी चंद्रमा के ऊपर पड़ती है।जिससे हमें इसकी दूसरी सतह दिखाई देती है।और हम चंद्रमा नही देख पाते।

 

(iv) मंगल(mars)

 

यह आकार में पृथ्वी का आधार है।परन्तु इसका द्रव्यमान पृथ्वी का केवल 1/10 गुना है।यह सूर्य के चारो ओर अपनी कक्षा में 687 दिन तथा अपनी अक्ष पर 1 दिन घूमता है।आक्सीजन के कण भी यहाँ पाए गए है।यह हल्का सा लाल दिखाई देता है।इसलिए इसे लाल ग्रह कहते है।मंगल के छोटे उपग्रह फोबोस तथा डाइमोस है।निक्स ओलम्पिया इस पर पाया जाने वाला सबसे बड़ा ज्वालामुखी इस ग्रह पर ओलम्पस मोन्स है।चैनल भी पाए गए है।वर्षा का बहुत बड़ा हिस्सा पृथ्वी के सापेक्ष आकाश में सूर्य के विपरित दिशा में होता है तो ऐसे दिनों में यह पृथ्वी के बहुत करीब होता है।

 

बाह्य उपग्रह या जोवियन ग्रह

 

यह मंगल की कक्षा के बाहरी तरफ उपस्थित है।बड़े और हल्के सघन ग्रह जैसे – बृहस्पति,शनि,अरूण,वरूण इस श्रेणी में आते है।ये हिलीयम,अमोनिया और मीथेन जैसे गैसों से मिलकर बने है।बृहस्पति के समान होने के कारण इन्हे जोवियन ग्रह भी कहते है।ये चंद्रमा जैसे बहुत से उपग्रह रखते है।

(i)बृहस्पति(jupiter)

 

यह सौर मंडल का सबसे बड़ा ग्रह है।इसे सूर्य के चारों तरफ अपनी कक्षा में चक्कर लगाने में 11 साल और 11 महीनें और अपनी अक्ष पर चक्कर लगाने में 9 घंटे 56 मिनट लगते है।इसमें 16 उपग्रह है।इसका पहचानने वाला कारक एक बड़ा धब्बा है।यह अनुमान लगाया गया है।कि इसका वातावरण बहुत जटिल है।
इसका द्रव्यमान दूसरें ग्रहो के संघटित द्रव्यमान में बहुत अधिक है।मंगल के बाद बृहस्पति आकाश में चमकने वाला दूसरा ग्रह और मंगल पर पतला वातावरण पाया जाता है।पाया जाता है।क्योंकि यह सूर्य की किरणों को परिवर्तित कर देता है।यह अनुमान लगाया जाता है कि बृहस्पति में हीलीयम और हाइड्रोजन गैसों के रूप में विधमान है।इसके बादल की बाहरी सतह मीथेन गैस की जबकि इस पर अमोनिया क्रिस्टल के रूप में उपस्थित है।

 

(ii)शनि(saturn)

 

बृहस्पति के अलावा,शनि जोकि पीले रंग का दिखाई देता है।इसकी विशिष्टता यह है कि सौरमंडल में इसके चारों ओर तीन सुन्दर वलय है।सूर्य के चारो ओर एक चक्कर लगाने में इसे 29 साल 5 महिने तथा अपने ध्रुव पर चक्कर लगाने में 10 घंटे 40 मिनट लगते है।इसके 18 उपग्रह है।शनि सभी ग्रहो में कम सघन है।इसका घनत्व पानी से कम है।यह आकार,द्रव्यमान तथा संघटन में बृहस्पति के समान है।यह बृहस्पति से ठंडा है।

 

(iii)अरूण(uranus)

 

यह पहला ग्रह है जोकि टेलीस्कोप की सहायता से खोजा गया है।विलियम हर्शेल ने यह ग्रह 1781 में खोजा था।अरूण के वातावरण में हाइड्रोजन तथा मीथेन गैसे पायी जाती है।शुक्र को छोड़कर अरूण तथा सभी दुसरें ग्रहों की तरह समान दिशा में घूमते है।
शुक्र की तरह अरूण पूर्व से पश्चिम की ओर घूमता है।इसका विशिष्ट गुण यह है कि अरूण घूर्णी अत्यधिक झूकी हूई है।परिणामस्वरूप यह पहियों की तरह घूमता है।यह सूर्य के चारों ओर चक्कर लगाने में 17 घंटे 14 मिनट लेता है।इसके 17 उपग्रह है।

 

(iv)वरूण(neptune)

 

यह सर विलियम हर्शेल द्वारा खोजा गया।यह न्यूटन के गुरुत्व के नियम पर आधारित है।जिसे न्यूटन ने 180 साल पहले दिया था।इसे सूर्य के चारों ओर एक चक्कर लगाने में 164 तथा अपने अक्ष पर एक चक्कर लगाने में 16 घंटे 7 मिनट लगते है।अरूण और वरूण पूर्णतः धूंधले है,तथा इन्हे नंगी आंखो से नही देखा जा सकता है।ऐसा इसलिए है कि क्योकि पुराने समय में केवल 6 उपग्रह देखे गए थे ये दूरबीन के बाद खोजे गए दो ग्रह है।जिनका उपयोग खगोलशास्त्र में होता है।इनके 9 उपग्रह है।

 

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