Blot,nut,washer

             बोल्ट(bolt)

बोल्ट एक प्रकार का गोल बना हुआ धातु होता है।जिसके उपरी सिरे पर हैड बना हुआ होता है।और नीचे की तरफ चुड़ी बना होता है।इसका उपयोग ज्यादातर फास्टनिंग के लिए किया जाता है।

मटेरियल– बोल्ट प्रायः माइल्ड स्टील की बनी होती है।कभी कभी ये ब्रास और लाइट एलाॅय के भी पाये जाते है।

वर्गीकरण

बोल्ट का चयन उसके लम्बाई,व्यास,मटेरियल और हैड के अनुसार किया जाता है।

प्रकार

निम्नलिखित प्रकार के बोल्ट उपयोग में लाया जाता है।

1.हैक्सागोनल हैड़ बोल्ट – इस बोल्ट का हैड़ छः पहेलु वाला होता है।इस बोल्ट का प्रयोग साधारण कार्यो में किया जाता है।इसका हैड स्टैंडर्ड साइज का होता है।

2.स्क्वायर हैड बोल्ट – इस बोल्ट का हैड चार पहेलु वाला होता है।इस बोल्ट का प्रयोग बहुत ही कम किया जाता है।

 

3.कप हैड़ बोल्ट – इस बोल्ट का हैड अर्धवृत्ताकार होता है। हैड के नीचे चोकोर नैक बना होता है।इस बोल्ट का उपयोग लकड़ीयो में किया जाता है।इसे कोच बोल्ट भी कहते है।

 

4.हुक बोल्ट – इस बोल्ट इस बोल्ट के सिरे पर हुक बनी होती है।और दूसरे सिरे पर चुडीयाॅ बनी होती है।इस प्रकार के बोल्ट का प्रयोग प्रायः क्रेन के साथ किया जाता है।जिसके द्वारा किसी भारी समानो को एक स्थान से दूसरे स्थान तक ले जाया जाता है।इसका उपयोग रफ कार्यो में किया जाता है।

5.आई बोल्ट – इस बोल्ट के एक सिरे पर हैड में छोटा सा सुराख बना होता है।इसका अधिकतर प्रयोग मशीनों में किया जाता है।जिससे किसी समानो को एक स्थान से दूसरे स्थान पर ले जाया जाता है।

6.टी हैड़ बोल्ट- इस बोल्ट का हैड़ अंग्रेजी के अक्षर T का आकार का होता है।इसका अधिकतर प्रयोग मशीन के टेबल के साथ मशीन वाइस,क्लेम्प या जिग और फिक्चर आदि को बांधने के लिए किया जाता है।इसका हैड़ मशीन के टेबल के T आकार के स्लाट में बैठ जाता है।

7.फाउंडेशन बोल्ट – जो बोल्ट किसी मशीन को फर्श के साथ फाउंडेशन करने के प्रयोग में लाए जाते है।उन्हे फाउंडेशन बोल्ट कहते है।

 

ये बोल्ट निम्न प्रकार के होते है-

 

A.रैग बोल्ट – यह एक फाउंडेशन बोल्ट है जिसका एक सिरा असमतल बना होता है और दूसरे सिरे पर चूडिया बनी होती है।इसके असमतल भाग को फर्श के नीचे कांक्रीट के साथ फिट कर दिया जाता है।फिर ऐसके ऊपर मशीन लगाकर कस दिया जाता है।ताकि मशीन कंपन से हिल न सके।

 

B.लेविस बोल्ट- यह भी एक फाउंडेशन बोल्ट है जिसके एक सिरे पर चूड़िया बनी होती है।और दूसरे सिरे पर एक साइड़ टेपर बना होता है।इसका प्रयोग करते समय प्लेन साइड़ के साथ चाबी लगाई जाती है।यदि बोल्ट को मशीन से निकालना होता है तो पहले चाबी निकालना होता है।

 

C.स्क्वायर हैड़ बोल्ट – यह एक इसका हैड चोकोर होता है और हैड के नीचे नैक चौकोर बनी होती है।इसके साथ एक चोकोर प्लेट भी लगाई जाती है।इसका उपयोग मजबूत और भारी फाउंडेशन के लिए किया जाता है।

 

D.जिग जैग बोल्ट – यह एक फाउंडेशन बोल्ट है जिसके एक सिरे पर चूड़िया बनी होती है।दूसरा सिरा टेढा मेढा वाला होता है।टेढा मेढा वाला सिरा को जमीन के नीचे फिट कर दिया जाता है।

E.फिस टेल बोल्ट – यह एक फाउंडेशन बोल्ट है जिसके एक सिरे पर चूडिया बनी होती है और दूसरे सिरे को बीच से काट कर फैला दिया जाता है।इस प्रकार इसका पीछे का भाग फैलाकर मछली के दुम जैसा हो जाता है।जिसे फर्श के साथ फिट कर दिया जाता है।

           नट(nut)

फास्टनिंग के लिए जिस साधन का प्रयोग किया जाता है उसे नट कहते है।यह एक धातु का पीस होता है।जिसके अंदर स्क्रू थ्रेड बना होता है।कार्य के अनुसार यह अलग अलग आकारो में पाया जाता है।

 

प्रकार

 

1.हेक्सागोनल नट – यह नट भी छः पहेलुओ वाला होता है।जिसमें प्रायः स्टैंडर्ड साइज की V आकार की चूड़ियां बनी होती है।इसका प्रयोग साधारण कार्यो के लिए किया जाता है।

 

2.स्क्वायर नट – यह नट चार पहेलुओ वाला होता है।जिसमें प्रायः स्टैंडर्ड साइज की V आकार की चूड़ियां बनी होती है।इसका उपयोग हेक्सागोनल की अपेक्षा कम होता है।

 

3.डोम नट – यह नट छः पहेलुओ वाला होता है।जिसके ऊपरी भाग पर गोलाकार गुम्बद बना होता है।इस नट को बोल्ट पर उतना ही कसा जा सकता है।जितनी गहराई में इसके चूड़ियां बनी होती है।

4.थम्ब नट – इस नट को नल्ड नट भी कहते है।यह नट गोल आकार का होता है।और इसकी गोलाई वाली बाहरी सरफेस पर नर्लिंग की होती है।इसको हाथ तथा उंगलीयों से भी घुमाते है।

 

5.विंग नट – इसको फ्लाइ नट भी कहते है।इस नट के बीच के भाग में चूडिय़ां बनी होती है।इसके दोनो ओर पंख के समान दो भाग बने होते है।इसको हाथ की उंगली और अंगुठे से पकड़ कर प्रयोग में लाया जाता है।इसका अधिकतर प्रयोग हेक्साफ्रेम,हैंड वाइस पर किया जाता है।

            वाॅशर(washer)

जब नट बोल्ट की फास्टनिंग की जाती है तो स्थिति के अनुसार वाॅशर का प्रयोग किया जाता है।वाॅशर प्रायः धातु की शीट की बनाई जाती है।जिसकी सेंटर में एक सुराख बना होता है।यह फैरस और नान फैरस की भी वाॅशर पाई जाती है।

प्रकार

1.प्लेन वाॅशर- इस प्रकार की वाॅशर प्रायः गोल आकार की होती है।जिसके सेंटर में सुराख बना होता है।इस वाॅशर का प्रयोग नट के नीचे स्पर्श के क्षेत्रफल को बढाने के लिए किया जाता है।यह वाॅशर प्रायः माइल्ड स्टील की बनाई जाती है।

2.स्प्रिंग वाॅशर- इस प्रकार का वाॅशर प्रायः कार्बन स्टील या स्प्रिंग स्टील की बनाई जाती है।इसके दो सिरे होते है।जिसका एक सिरा ऊपर की ओर मुड़ा होता है तथा दूसरा सिरा नीचे की ओर मुड़ा होता है।यह वाॅशर ज्यादा कम्पन,ज्यादा झटके होने वाले जगहो पर उपयोग में लाई जाती है।यह दो प्रकार की होती है,1.सिंगल क्वाइल 2.डबल क्वाइल

3.टैब वाॅशर- इस प्रकार की वाॅशर में प्रायः दो टैब बने होते है।और बीच में सुराख बना होता है।इस वाॅशर से नट को लाॅक किया जाता है।इसका प्रयोग करते समय पहले नट को इस वाॅशर के साथ कस दिया जाता है।फिर इस वाॅशर का एक टैब नट के एक पहलू पर मोड़ दिया जाता है।और दूसरे टैब पहले टैब के विपरीत दिशा में मोड़ दिया जाता है।यह वाॅशर झटके और कम्पन सहने की क्षमता रखता है।

प्रयोग

1.टेम्परेरी फास्टनिंग करते समय पार्ट्स की सरफेस पर नट से खुरचन लगने से बचाने के लिए।

2.टेम्परेरी फास्टनिंग करते समय अच्छी ग्रीपींग लाने के लिए।

3.नट और पार्ट्स के बीच में स्पर्श का क्षेत्रफल बढाने के लिए।

4.नट पर कंपन या झटके का असर कम करने के लिए।

5.फास्टनिंग करते समय adjustment करने के लिए।

 

तो आपको मेरी दी गई जानकारी कैसी लगी मुझे जरूर कमेंट करे।