यंत्रविन्यास(Mechanism)

 

जब किसी तीव्र गति से चल रही चैन को रोक दिया जाता है।तो जिस कड़ी के सहारे चैन घूम रही थी उसे ही Mechanisms कहा जाता है।यह प्रायः चार कड़ीयो से मिलकर बना एक यंत्र होता है,जिसे हम सरल यंत्र विन्यास के नाम से जानते है।अगर जो यंत्र विन्यास चार या उससे अधिक कड़िया से मिलकर बनती है।उसे हम यौगिक यंत्र विन्यास कहते है।

जब किसी यंत्र में शक्ति पारेषित करने के बाद वह यंत्र अलग-अलग प्रकार का कार्य करता है तो उसे मशीन कहा जाता है।

यंत्र विन्यास को मुख्यतः निम्न बिन्दुओ में बाटा गया है-

 

    four bar chain machanisms

 

यह chain चार छड़ो से मिलकर बनी होती है।जो चार युगल (pair) बनाती है।ये छड़ अलग अलग लंबाई की हो सकती है।इसमे हर एक जोड़ों या युगलों का कार्य सरकने या घूमने का होता है।mechanism मे उपयोग होने वाली हर कडी जो एक पूरा चक्कर लगाती है उसे क्रेन्क कहते है।और जो कड़ी अधूरा चक्कर लगाती है उसे लीवर कहते है।

यह चार छड़ो से बने विभिन्न यंत्र विन्यास निम्न लिखित है-

(1)धरन इंजन या क्रेन्क तथा लीवर यंत्र विन्यास(beam engine or crank lever mechanism)-

यह सीधे घूमने वाली गति को पीछे घूमने की गति में परिवर्तित करता है।

(2)दोहरा क्रेन्क यंत्र विन्यास(double crank mechanism)-

यह यंत्र विन्यास का उपयोग ज्यादातर रेल इंजन में लगे पहियो को घुमाने में किया जाता है।जब रेल का एक पहिया घूमाता है तो दूसरे पहिया को घुमाने के लिए इन्ही mechanism का उपयोग किया जाता है।

(3)दोहरा लीवर यंत्र विन्यास(double liver mechanism)-

जब कोई इंजन गति अवस्था में होती है तो गति की स्थिति को बताने के लिए double liver mechanism का उपयोग करते है।

 

(4)एकल स्लाडर क्रेंक यंत्र विन्यास(single slider crank mechanism)-

इसका प्रयोग पीछे की तरफ घुमाने वाली गति को सीधे घूमने वाली गति को परिवर्तित करने में किया जाता है।

 

इस चैन की मुख्य उत्क्रम निम्नलिखित है-

 

(अ)दोलन सिलेंडर इंजन (oscillating cylinder engine)

 

इसका प्रयोग उल्टी घूमने वाली गति को परिवर्तित करने के लिए किया जाता है।

 

(ब)द्रुत वापसी यंत्र विन्यास(quick return mechanism)

 

इसका उपयोग औधोगिक क्षेत्रो मे उपयोग होने वाली मशीन जैसे शेपर्ड तथा स्लॉटर का कार्य करने वाली मशीनो में होता है।इसमें लगा क्रेंक एक समान कोणीय गति में घूमता है।जिसे कर्तन अघात तथा द्रुत वापसी अघात के नाम से जाना जाता है।

 

(5)दोहरा सरक क्रेंक यंत्र विन्यास (double silder crank mechanism)

 

इस mechanism में दो घूमाऊ और दो सरकन pair होते है।यह दिर्घ वित्तकार की आकृति में घूमता है।इस chain के दो उत्क्रम होते है।

(1)scotch yoke mechanism
(2)Oldham coupling mechanism

      higher pair mechanism

 

(i)कैम एव फालोअर (cam and follower)-

यह एक higher pair की mechanism होती है।ज्यादातर परिस्थितीयो में कैम तथा फालोअर की फ्रेम में स्प्रिंग के साथ मिलकर तीन कड़ी का mechanism बनाते है।कैम,मशीन फ्रेम के साथ घूमाऊ pair तथा फालोअर फ्रेम के साथ सरकन pair बनाते है।कैम एक निश्चित दिशा में घूमने वाला mechanism है।तथा फालोअर दोलन करने वाला mechanism है।कैम डिस्क या बेलनाकार आकार की होती है।फालोअर रोलर,छुरदार या चपटा मुखी होते है।

(ii)पट्टा या रस्सा चालन (belt and rope drive)

य़ह भी एक उच्चतम pair का mechanism है।इसमे एक मोटर द्वारा shaft को घुमाया जाता है।जिसमें घिरनी लगी होती है।तथा दुसरी ओर shaft के साथ चालित घिरनी लगी होती है।जिसे पट्टे या रस्से की सहायता से जोड़ा जाता है।इस प्रकार के चालक शाफ्ट से चलित शाफ्ट को एक शक्ति प्रदान करती है।पट्टा या रस्सा इन दोनो परिधी से होकर गुजरता है।चालक शाफ्ट से चलित शाफ्ट तक शक्ति पारेषित करती है।जिससे घिरनी घूमती है।

(iii)गियर चालन (gear drives)-

इस higher pair mechanism में दो या दो से अधिक गियर को एक साथ जोड़ा जाता है।जिससे की एक शाफ्ट दूसरे शाफ्ट को शक्ति प्रदान करती है।जिसके बाद शाफ्ट घूमती है।इसमे दो गियर किसी रेखा या बिन्दु पर एक दूसरे पर सम्पर्क स्थापित कर शक्ति प्रदान करते है।

(iv)बाल एव रोलर बियरिंग (ball and roller bearing)-

इस higher pair mechanism में बियरिंगो में बियरिंग आपस में स्पर्श करके घूमते है।इसमे घूमने वाले सतह के बीच केवल बिन्दु भर का फर्क होता है।

तो दोस्तो आपको मेरी दी गई जानकारी कैसी लगी मुझे जरूर कमेंट करे।

जल प्रदूषण(water pollution)का कारण क्या है?

कार्बोहाइड्रेट(Carbohydrates)क्या है?

अल्टरनेटर(alternator)किसे कहते है?

वेल्डिंग पोजीशन(Welding position)क्या होता है?