महाभारत के रोचक तथ्य

 

महाभारत

दोस्तों आज हम बात करेंगे mahabharat के इतिहास रोचक तथ्य के बारे मे आप मे से बहुत कम ही लोग महाभारत के इतिहास के बारे मे जानते होगे।तो  महाभारत के इतिहास के बारे मे जानने के लिए आप मेरे वेबसाइट पर बने रहिए और आगे पढ़ते जाइए ।

महाभारत की रचना –


महाभारत का इतिहास सदियों पुराना है। आज के समय मे जिसे द्वापर युग कहते है।वैसे तो इसका वास्तविक नाम महाभारत था लेकिन महाभारत को जय के नाम से भी जाना जाता था।जय का मतलब तो आप जानते ही होंगे।महाभारत को भारत ,पंचम वेद ,शत- साहासनि संहिता के नाम से भी जाना जाता है।महाभारत के रचना कार वेद व्यास थे।महाभारत की रचना 800 ई.पूर्व के करीब की गई थी तथा आखिरी बार  इसकी रचना गुप्त काल में की गई थी। महाभारत की रचना करने में 3 वर्ष लगे थे।भारतीय परम्पराओं के अनुसार महाभारत की रचना 3000 ई.पू  माना गया है।

महाभारत के विभिन्न नाम –


कहा जाता है कि महाभारत का नाम महाभारत आदि पर्व 56वाॅ अध्याय के श्लोक 30 मे कहा गया है की भारतवंशी योद्धाओ के महान कृत्यो का वर्णन मिलता है जिससे इसका नाम महाभारत रखा गया।

दुसरी तथ्यों के अनुसार महाभारत का अर्थ जिसमें महा का अर्थ विशाल ग्रंथ तथा भारत का अर्थ भारत वंशों के वीर योद्धा के नाम पर रखा गया।इसी तरह जय नाम महाभारत में पांडवों के विजय गाथा के नाम पर जय रखा गया।

महाभारत के 18 भाग


महाभारत को सम्पूर्ण कथा को 18 पर्व में बांटा गया है।जिसमें पूर्ण महाभारत समाहित है तथा बड़ी घटनाओ को 18 पर्व में बताया गया है।
तो आइए जानते है महाभारत के 18 पर्व में हुई घटनाओ के बारे मे –

1)आदि पर्व – इसमे कथा 19 अध्यायों में बताया गया है।इसमे महाभारत के प्रारंभिक घटनाओ का वर्णन देखने को मिलता हैं।

2)सभा पर्व – इसमे 20 से 28 अध्यायों में राज्य तथा सभाओं आदि के बारे में बताया गया है।

3)अरण्य पर्व- इसमे 29 से 44 अध्यायों में महाभारत के निर्वासन के विषयो के बारे मे बताया गया है।

4)विराट पर्व- इसमे 45 से 48 तक के अध्यायों में राजाओं के बीच अंतर्कलह का वर्णन किया गया है।

5)उद्योग पर्व – इसमे 49 से 60 तक के अध्यायों में राजाओं द्वारा बनाए गए योजनाओं के बारे मे वर्णन किया गया है।

6)भीष्म पर्व- इसमे 61 से 64 तक भीष्म ने प्रारम्भिक योजनाओं का उल्लेख मिलता है।

7)द्रोण पर्व- इसमे 65 से 72 अध्यायों तक युद्ध का वर्णन मिलता हैं।

8)कर्ण पर्व – इसमे 73 वे अध्याय में कर्ण से युद्ध का वर्णन मिलता है।

9)शल्य पर्व – इसमे 74 से 77 अध्यायों तक युद्ध का वर्णन मिलता हैं।

10)सौप्तिक पर्व – इसमे 78 से 79 अध्याय तक युद्ध के उपरांत हुए जनसंहार का वर्णन मिलता है।

11)स्त्री पर्व- इसमे 79 से 83 तक के अध्यायों में जनसंहार के उपरांत होने वाले क्रंदन अन्य घटनाओ का वर्णन मिलता है ।


12)शांति पर्व – इसमे 84 से 86 तक शांति जन्य तथ्यों को उल्लिखित किया गया है।

13)अनुशासन पर्व – इसमे 87 से 88 अध्याय तक विधियों के अनुसार युद्ध करने की सीख दी गयी है।

14)अश्वमेधिक पर्व – इसमे मात्र एक अध्याय 89 में पूर्ण घटित तथ्यों का वर्णन मिलता है।

15)आश्रमवासीक पर्व – इसमे 90 से 92 तक के अध्याय में  वैराग्य प्रवृत्ति का जीवन का उल्लेख किया गया है।

16)मौपल पर्व – इसमे सिर्फ 93 वे अध्याय में वैनाशिक तथ्यों का उल्लेख मिलता है।

17)महा प्रस्थानिक पर्व – इसमे 94 वे अध्याय में महाभारत के समाप्ति का उल्लेख किया गया है।

18)स्वर्गारोहण पर्व – इसमे 95 वे अध्याय में महाभारत की कथा समाप्त हो जाती है और भारत वंशी स्वर्ग की ओर प्रस्थान करते है।

 

महाभारत के रोचक तथ्य

 

महाभारत लेखन का क्रम –

प्रारंभ में महाभारत में 8800 पद्य थे,जिसका नाम जय था।समय के बढ़ने के बाद इनकी संख्या 24000 हो गई।और महाभारत का नाम भारत हो गया।अंतिम रचना के दौरान पद्य की संख्या 100000 हो गयी जिसे महाभारत कहा गया।

महाभारत के अनुसार पंचरत्न ग्रंथ –

1)श्रीमद्भागवत गीता
2)विष्णु सहस्त्र नाम
3)अनु स्मृति
4)भीष्म स्वत राज
5)गजेंद्र मोक्ष

सर्वप्रथम महाभारत किसने सुना


आचार्य वेद व्यास ने सर्वप्रथम महाभारत अपने पुत्र को सुनाई  थी।जिनका नाम शुक था तथा अपने चार शिष्यों को भी सुनाई थी जिनका नाम सुमनंतु,जैमिनी,पैल,वैशम्पायन


महाभारत में ब्रम्हा को सात जन्मों में बताया गया है –


1)मानस ब्रम्हा 2)चाक्षुष ब्रम्हा 3)वाचस्पत्य ब्रम्हा 4)श्रावण ब्रम्हा 5)नासिक्य 6)अण्डज हिरण्यगर्भ ब्रम्हा 7)कमलोदभव ब्रम्हा

महाभारत में वर्णित सप्त द्वीप


महाभारत में पूरे विश्व में सात द्वीप मे बंटा हुआ है जिसका वर्णन किया गया है-
1)जम्यू 2)शक 3)कुश 4)शाल्मलि 5)पुष्कर 6)श्वेता 7)कौच

महाभारत मे वर्णित पर्वत


1)हैमावत 2)हेमकुट 3)निषाद 4)नील 5)श्वेत 6)मलय 7)सृंगवन

महाभारत मे वर्णित कौरव-पांडव की सेना –


महाभारत मे सात पान्डवो तथा ग्यारह कोरवो की अक्षौहिणी सेना का जिक्र है।मतलब एक अक्षौहिणी सेना मे 21869 रथ,21869 हाथी,109349 पैदल सैनिक,65609 घुड़सवार थे।

यही पान्डवो की सेना मे 153090 रथ,153090 हाथी,765450 पैदल सैनिक,459270 घुड़सवार सैनिक थे।

कोरवो मे 240570 रथ,240570 हाथी,1202850 पैदल सैनिक, 721710 घुड़सवार सैनिक थे।

दोस्तो आपको मेरी दी गई जानकारी कैसी लगी मुझे ज़रूर कमेंट करे।

मिश्रण किसे कहते है?

ट्रांसफार्मर को ठंडा करने विधि कौन कौन सी है?

उच्च दाब वेल्डिंग व निम्न दाब वेल्डिंग क्या है?