चुम्बक(magnet)

magnet दोस्तो आज हम बात करेंगे छड़ से या लोहे को मैग्नेट में कैसे बदलेगे।तो चलिए जानते है।
एक लोहे के छड़ या टुकड़े को मैग्नेट बनाने की कुछ विधी के बारें में
इसे बनाने की तीन विधी है-

(1)स्पर्श विधी(touch method)

(2)इलैक्ट्रिक करंट के द्वारा(by means of electric current)

(3)प्रेरण विधी(induction method)

 

       स्पर्श विधी(touch method)

 

इस विधी को भी निम्न रूप में विभाजित की गई है।

(a)एक स्पर्श विधी(single touch method)

(b)दोहरी स्पर्श विधी(double touch method)

(c)विभाजित स्पर्श विधी(divided touch method)

(a)एक स्पर्श विधी :

इस विधी में जिस स्टील बार को मैग्नेट बनाना है।उसे किसी मैग्नेट के एक पोल के साथ एक ही दिशा में इस प्रकार रगड़ते है की दूसरा पोल दूर रहे।छड़ को चुम्बकीय रूप में लाने के लिए इस विधी को कई बार दोहराते है।

(b)दोहरी स्पर्श विधी :

इस विधी में जिस बार को चुम्बक बनाना होता है उसको मैग्नेट के दो विपरीत ध्रुवों के बीच रखते है और रगड़ने वाले चुम्बको को छड़ के बीच इस प्रकार रखते है की उनके बीच में लकड़ी का एक छोटा टुकड़ा पड़ा रहे।इनको कभी भी स्टील बार की सतह से उठाना नही चाहिए।फिर इन्हे एक सिरें से दूसरे सिरें तक रगड़ते है और अंत में वही रगड़ना बंद करते है जहां से रगड़ना शूरू किया था।

(c)विभाजित स्पर्श विधी :

यहां भी रगड़ने वाले मैग्नेट के दो भिन्न भिन्न पोलो को पहले बताई गई अवस्था की तरह रखा जाता है।उसके बाद वे स्टील बार की सतह के विपरीत सिरों से अलग किये जाते है।रगड़ने वाले मैग्नेटों को तब स्टील की छड़ की सतह से ऊपर उठा लेते है।और फिर छड़ के बीच में ले आते है।इस विधी को बार-बार दोहराते है।स्टील की छड़ इस प्रकार से स्थाई चुम्बक बन जाती है।परन्तु इसकी शक्ति बहुत कम होती है।

        इलैक्ट्रिक करंट द्वारा

इस विधी में मैग्नेट बनायी जाने वाली छड़ के ऊपर इन्सुलेटिड काॅपर वायर लपेट देते है और फिर कुछ समय तक बैटरी से अधिक करंट (D.C)तार में से गुजारी जाती है और स्टील बार तब अधिक चुम्बकीय हो जाती है।यदि छड़ नर्म लौहे की है तब इसमें चुम्बकीय गुण करंट बहने तक रहेगा लेकिन करंट का प्रवाह बंद होते ही इसका चुम्बकीय गुण लगभग समाप्त हो जाता है।इस ढंग से बनाये गये मैग्नेट को इलैक्ट्रोमैग्नेट कहते है और मुख्यतः इसका प्रयोग प्रयोगशाला में किया जाता है।

          प्रेरण विधी 

यह स्थाई मैग्नेट बनाने का व्यापारिक विधी में ऐसा पोल चार्जर प्रयोग किया जाता है,जिसमें कि अधिक टनों वाली एक क्वाइल होती है और इसमें
अंदर एक लोहे की कोर होती है।
मैग्नेट बनाये जाने वाले स्टील के टुकड़े को क्वाइल के भीतर पड़ी हुई,लोहे की कोर पर रखते है और फिर क्वाइल में से डायरेक्ट करंट गुजारी जाती है।अब आयरन कोर एक शक्तिशाली मैग्नेट बन जाता है और इस प्रकार इस पर रखा हुआ स्टील का टुकड़ा भी इन्डक्शन द्वारा मैग्नेट बन जाता है।कंरट को बंद करने के बाद चुम्बकीय बना हुआ स्टील का टुकड़ा उठा लिया जाता है।

गुण : इस विधी में निम्नलिखित गुण है:

1.इस विधी में स्टील के छोटे-छोटे टुकड़ो को भी आसानी से चुम्बकीय बनाया जा सकता है।

2.मैग्नेट बनाने में बहुत कम समय लगता है।

3.किसी भी आकार के स्टील के टुकड़ो को आसानी से चुम्बकीय बनाया जा सकता है।

प्रयोग :

स्पीकर,टेलीफोन,माइक्रोफोन,इयरफोन,इलेक्ट्रिक यंत्र इत्यादि के लिए स्थाई मैग्नेट बनाने की यह एक व्यपारिक विधी है।

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