ऊष्मा इंजन(heat engine)

 

ऊष्मा इंजन (heat engine)वह कोई भी ऐसी चक्रिय युक्ति होती है,जो ऊष्मा को सतत् रूप से यांत्रिक कार्य में परिवर्तित करती है।ऊष्मा इंजन एक ऐसा निकाय है जिसकी सीमा से होकर केवल ऊष्मा एंव कार्य प्रवाहित होते है ।

 

ऊष्मा इंजन के तीन भाग होते है—

     ऊष्मा स्त्रोत(source of heat)

ऊष्मा स्त्रोत किसी स्थिर उच्च तापमान पर स्थित एक ऐसी वस्तु होती है।जिससे ऊष्मा इंजन का कार्यकारी पदार्थ ऊष्मा लेता है।ऊष्मा स्त्रोत का ऊष्माधारीता बहुत अधिक होती है।इससे कितनी भी ऊष्मा ली जा सकती है।

   कार्यकारी पदार्थ(working substance)

कार्यकारी पदार्थ वह होता है जो स्त्रोत से ऊष्मा लेकर यांत्रिक कार्य करता है।

          सिंक(sink)

किसी स्थिर निम्न ताप पर स्थित एक ठंडी वस्तु जिसको कितनी ही ऊष्मा दी जा सके,सिंक कहलाती है।सिंक का ताप स्त्रोत के ताप से कम होता है।इसकी ऊष्माधारिता भी बहुत अधिक होती है।
ऊष्मा इंजन में कार्यकारी पदार्थ स्त्रोत से ऊष्मा लेता है।ऊष्मा इंजन में इस ऊष्मा का कुछ भाग यांत्रिक कार्य में परिवर्तित हो जाता है तथा शेष भाग सिंक को देकर अपनी प्रारंभिक अवस्था पर वापस आ जाता है।यह पूरी क्रिया ऊष्मा इंजन चक्र कहलाती है।इसमें कार्यकारी पदार्थ की आंतरिक ऊर्जा अपरिवर्तित रहती है।

 

माना कि इंजन की कार्यकारी पदार्थ परम ताप t1 वाले स्त्रोत से q1 ऊष्मा लेता है।वह यांत्रिक कार्य W करता है और परम ताप t2 वाले सिंक को q2 ऊष्मा देता है।अतः कार्यकारी पदार्थ द्वारा कुल अवशोषित ऊष्मा

DLTA Q = Q1 -Q2

इसे यांत्रिक कार्य करने में प्रयुक्त किया जाता है।ऊष्मा गति के प्रथम नियमानुसार

Q1 – Q2 = W

चक्र पूरा करने के पश्चात कार्यकारी पदार्थ अपनी प्रारंभिक स्थिति में लौट आता है।अतः पदार्थ की यांत्रिक ऊर्जा शून्य होती है।

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