अर्थिंग(earthing)क्या है?

 

Earthing से हमारा तात्पर्य मनुष्य के शरीर को बिजली के झटके से बचाने के लिए उपकरण की धात्विक बॉडी का पृथ्वी से संपर्क बनाना है।

सभी मशीनों,स्टार्टर या wearing के धात्विक कवर इत्यादि अजीवित होते है,लेकिन खराब कारीगरी या insulation के खराब होने के कारण ये जिवित हो सकते है।जब कोई व्यक्ति मशीन या wearing के ऐसे जिवित भाग के संपर्क में आ जाता है।तो उसे बिजली का झटका महसूस होता है।तो ऐसे सख्त झटका से बचने के लिए सभी धात्विक कवर और फ्रेम को अर्थ कर दिया जाता है।एक अच्छी earthing की रेजिस्टेंस बहुत कम होती है।और लीकेज करेंट को आसानी से गुजरने देती है।

Earthing करने की विधियां(system of Earthing)

1)pipe earthing                  2)plate earthing

 

(1)Pipe earthing

 

इस विधि में 38mm व्यास के 2m लंबे glavenized iron(GI) पाइप (साधारण अर्थिंग के लिए)की सतह पर 12mm diameter  के सूराख निकालकर पाइप को गिली जमीन में लम्बवत दबा दिया जाता है।जो एक अर्थ इलेक्ट्रोड का कार्य करता है।यदि जमीन शुष्क है तब पाइप की लंबाई 2.75m तक ली जाती है।पाइप को आसानी से गाढ़ने के लिए पाइप का निचला सिरा नुकीला बना दिया जाता है।

GI पाइप को कितनी गहराई तक गाढ़ना चाहिए यह मिट्टी की नमी पर निर्भर करती है यह गहराई 4.75m तक होनी चाहिए लेकिन यह कोई नियम नहीं है आप थोड़ा ज्यादा भी ले सकते है।19mm diameter तथा पर्याप्त लंबाई के पाइप(जिसकी लंबाई मिट्टी की नमी पर निर्भर करती है)को reducing साकेट(size 38mm×19mm)की सहायता से 38mm diameter के पाइप (अर्थ इलेक्ट्रोड)के साथ जोड़ दिया जाता है।

19mm व्यास वाले पाइप के ऊपरी हिस्से पर एक जाली दार कीप या ढक्कन लगा दिया जाता है।गर्मियों के दिन कनेक्शन को अच्छा रखने के लिए कीप में पानी डाला जाता है।कीप को cement के बॉक्स में बंद कर दिया जाता है।अर्थ इलेक्ट्रोड पाइप,नमक और लकड़ी के कोयले के बुरादे की एक के बाद एक 15cm मोटी तह से घिरा रहता है।इसलिए नमक डाल दिया जाता है।क्योंकि वह मिट्टी से नमी शोषित करता है।लकड़ी का कोयला अर्थ इलेक्ट्रोड के चारो तरफ नमी बनाए रखता है।इस प्रकार रेजिस्टेंस घट जाता है।दोष दार करंट को भलीभाँति ले जाने के लिए योग्य साईज के G.I अर्थ तार(जिसे अर्थ कन्टिन्यूटि कन्डक्टर भी कहते है)को कीप के नीचे और 19mm diameter पाइप के बीच जोड़ दिया जाता है।फिर इसे 12mm diameter G.I पाइप में डालकर पृथ्वी के बीच 60cm की गहराई पर दबाकर प्रत्येक मैन स्विच,distribute box और मशीन तक अर्थिंग के लिए ले जाया जाता है।

(2)Plate Earthing

 

इस विधि में जमीन में पर्याप्त नमी मिलने तक एक गहरा गड्ढा खोदा जाता है (लगभग 3m) । तब G.I. या कॉपर प्लेट को अर्थ कन्टिन्यूटि कन्डक्टर के साथ नट और बोल्ट से जोड़ते हैं।

जब एक G.I. प्लेट प्रयोग की जाती है तब इसका साइज 60 cm × 60 cm × 6.35 mm (2 ×2 × 1÷4) होती है तब इसका साइज60 cm × 60 cm × 3.18 mm (2 ×2 × 1÷8) होना चाहिए। यह हमेशा ध्यान में रखना चाहिए कि G.I. plate के लिए नट और बोल्ट G.I. के और कॉपर प्लेट के लिए ये कॉपर के होने चाहिए।

इसके बाद प्लेट को गड्ढा की तली में रखते है और इसे 15cm मोटी नमक और लकड़ी के कोयले की एक के बाद एक तह से ढक देते है।तब जुड़ी हुई अर्थ तार को 12.7mm व्यास के G.I पाइप के ऊपरी सिरे पर एक जालीदार कीप अर्थ इलेक्ट्रोड के गड्ढा में पानी डालने के लिए लगायी जाती है।इसको cement के एक box में बंद कर दिया जाता है।जिसके मुह पर एक कब्ज़े दार ढक्कन लगा होता है जो धूल मिट्टी को इसमे जाने से बचाता है।

 

अर्थिंग के नियम

 

  1. घरों की लेड और कन्ड्यूट पाइप वायरिंग में अर्थिंग के लिए 14 SWG का एक ठोस कंडक्टर होना चाहिए।
  2. मेन स्विच,distribution box,selling fan,braket इत्यादि के धात्विक कवर व वाल साकेट के अर्थ प्वाइंट सहित सभी को अर्थ करना चाहिए।
  3. सभी मीडियम वोल्टेज की मशीनों के धात्विक कवरो को दो अलग अलग अर्थ कनेक्शनो द्वारा अर्थ कर देना चाहिए ।
  4. किसी भी अवस्था में अर्थ कन्टिन्यूटि कन्डक्टर की रेजिस्टेंस पूरी वायरिंग में 1ॐ से अधिक नहीं होनी चाहिए।
  5. साधारण मिट्टी की अवस्था में इलेक्ट्रोड की अर्थ रेजिस्टेंस 3ॐ से अधिक नहीं होनी चाहिए और चट्टानी भूमि के लिए यह 8ॐ से अधिक नहीं होनी चाहिए।

तो दोस्तो मेरी दी गई जानकारी आपको कैसी लगी मुझे जरूर कमेंट करें।

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