शक्तिमापी(dynamometer)

 

शक्तिमापी dynamometer एक प्रकार का ब्रेक है,लेकिन साथ ही साथ यह शक्ति मापने का कार्य भी करता है।

शक्तिमापी को निम्न प्रकार से वर्गीकृत किया जाता है।

  1. अवशोषण शक्तिमापी(absorption dynamometer)
  2. पारेषण शक्तिमापी (transmission dynamometer)

1)अवशोषण शक्तिमापी – इस प्रकार की शक्तिमापी में प्रथम चालक के क्रैंक शाफ्ट पर प्राप्त ऊर्जा का अवशोषण हो जाता है।घर्षण द्वारा उपलब्ध ऊर्जा को घर्षण द्वारा उष्मा-ऊर्जा में बदल कर अवशोषित किया जाता है।और यह व्यर्थ जाती है।इस प्रकार की शक्तिमापी साधारण स्तर की शक्ति को ही मापती है।इसके निम्न उदाहरण है-

(अ)रस्सा ब्रेक शक्तिमापी(Rope Brake Dynamometer)

इसका प्रयोग अधिकतर प्रयोगशाला में होता है। इसमें एक पुली या गतिपाल पहिये (flywheel)  पर दो तीन बार रस्सा लपेटा जाता है। गतिपाल पहिया इंजन सॉफ्ट पर एक कुंजी (key) द्वारा दृढ़ता से लगा होता है । रस्से का ऊपरी सिरा फ्रेम से लटकी हुई स्प्रिंग तुला (spring balance) से जुड़ा रहता है तथा निचले सिरे पर आवश्यक भार W  लगाया जाता है । पुली ड्रम पर रस्से को फिसलने से रोकने के लिए तीन या चार लकड़ी के ब्लॉक प्रयोग में लाये जाते हैं।

माना की ड्रम का व्यास D मी.,रस्से का व्यास d मी.,स्प्रिंग तुला पर माप S (न्युटन),लटकाया गया भार W (न्युटन) तथा टेकोमीटर द्वारा  ज्ञात शाफ्ट की गति N च.प्र.मि. है।अतः ब्रेक शक्ति (brake power)

P= (W-S)(D-d)πN÷60×100 kW

(ब) प्रानी ब्रेक शक्तिमापी(prony brake dynamometer)

इसमें एक सरल पुली होती है जो प्रथम चालक,जिसकी शक्ति मापी जाती है,की शाफ्ट पर कुंजी द्वारा लगी होती है।इसमें लकड़ी के दो गुटके इस प्रकार लगे होते है की प्रत्येक गुटका पुली की आधी से कम परीधी को ढके होता है।ये दोनो लकड़ी के गुटके बोल्टो द्वारा स्प्रिंग के साथ पहिये पर बंधे रहते हैं । इनका कसाव नट द्वारा घुमाकर बढ़ाया जा सकता है।  ये ब्लॉक पुली पर ब्रेक-शू ( brake shoe) का कार्य करते हैं।  नीचे के गुटके के साथ एक लीवर लगा रहता है जिसके सिरे पर W  भार आवश्यकतानुसार लगाया लगाया जा सकता है । इसी गुटके के दूसरी ओर एक छोटी भुजा पर संतुलन     भार  B लगा होता है जो शक्तिमापी का निष्क्रिय अवस्था में संतुलन में रखता है ।

माना की स्थिर भार W (न्युटन) ,लीवर भुजा l (m) तथा पुली की गति N r.p.m है।अतः मापी गयी शक्ति,

P=2πNWl÷60×1000 kW

(2) पारेषण शक्तिमापी

(Transmission Dynamometer)

 

इस शक्तिमापी में प्रथम चालक द्वारा प्राप्त ऊर्जा को मापने के पश्चात  उसे मशीन पर प्रयोग हेतु पारेषित कर दिया जाता है। इसके निम्न उदहारण हैं-

(अ)पट्टा पारेषण शक्तिमापी (belt transmission dynamometer)

इसमें चालक पुली को प्रथम चालक की शाफ्ट से जोड़ते है।इसमें एक चालक तथा एक चलित घिरनी रहती है और दो गाइड घिरनियाॅ एक लीवर भुजा पर लगी रहती हैं।लीवर भुजा फ्रेम पर पिवेटिड रहती है।ये गाइड घिरनीयाॅ अपने केन्द्रो पर घूम सकती है।चालक पुली को एक सिरा विहीन पट्टे द्वारा गाइड घिरनीयो के माध्यम चलित अवस्था में गाइड घिरनीयाॅ पर पट्टे के बीच तनावो के अन्तर को लीवर के दाये सिरे पर भार W द्वारा सन्तुलित किया जाता है।लीवर तथा घिरनीयो के भार को लीवर के बाये सिरे पर संतुलक भार द्वारा संतुलित किया जाता है।

माना की बड़ी भुजा पर अचर भार W,भार W की चालक पुली के केन्द्र से क्षैतिजीय दूरी l,घिरनी का व्यास D,चालक घिरनी के केन्द्र से गाइड घिरनीयो के केन्द्र के बीच क्षैतिज दूरी a, तथा चालक पुली की गति r.p.m है तो शक्ति

P=πDNWl÷2a×60×1000 kW

(ब) मरोड़ घूर्ण शक्तिमापी (Torsion dynamometer)

इसका उपयोग उच्च मान की शक्ति को मापने मे किया जाता है।अतः  अधिकतर इसका उपयोग समुद्री जहाजो की भाप टारबाइनो की शक्ति मापने में किया जाता है।

मरोड़ सम्बन्ध से हम जानते है की

T/J = Gθ/l

अतः T= GJ/l×θ=Kθ K=GJ/l

अतः Tθ

इस प्रकार θ का मान ज्ञात होने पर मरोड़ घूर्ण का मान ज्ञात हो जाता है।

पारेषित शक्ति P= 2πNT/60×1000kW

दोस्तो आपको मेरी दी गई जानकारी कैसी लगी मुझे जरूर कमेंट करे।

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