belt drive

 

Belt drive पट्टा चालन में चालक तथा चलित शाफ्ट पर एक एक पुली लगाई जाती है।इसमे पट्टे की सहायता से गति पारेषित की जाती है।पट्टा सिरा विहीन होता है।घर्षण के कारण शक्ति तथा गति का पारेषण होता है।घर्षण अधिक होगा तो शक्ति पारेषण भी अधिक होगा,इसलिए यह घर्षण चालन भी कहलाता है।पट्टे का घिरनीयो पर फिसलना एक समान्य क्रिया है,अतः शक्ति पारेषण धनात्मक नही होता है।पट्टे के जिस भाग को चालक पुली खिचती है।वह खिचाव पक्ष कहलाता है और दूसरा भाग ढिला पक्ष कहलाता है।

पट्टा पुली के जितने भाग पर लिपटा रहता है,उस भाग द्वारा पुली के केन्द्र पर बनाया गया कोण छादन कोण कहलाता है।

पट्टा चालन का चुनाव निम्न आधार पर किया जाता है-

 

1.चालक एंव चलित शाफ्ट की चाल

2.जोडे जाने वाले शाफ्टो के बीच केन्द्र दूरी

3.चाल घटाव अनुपात

4.शक्ति पारेषण

5.शाफ्ट ले आउट

6.उपलब्ध स्थान

7.धनात्मक चालन की आवश्यकताॅए

 

पट्टो के प्रकार 

 

पट्टा चालन मे निम्न काट के पट्टे प्रयोग मे लाये जाते है-

 

(1) चपटा पट्टा- यह आयताकार काट का होता है।इसके लिए  घिरनीयो की सतह भी चपटी होती है।इनको ऊट के बाल,रबर,केनवास तथा चमड़े आदि से बनाया जाता है।इनको चमड़े की कई परतो को आपस में जोड़कर या रबर की कई परतो को सीकर बनाया जाता है।अधिक परतो वाला पट्टा मजबूत होता है।इन परतो को प्लाई कहते है।घिरनी तथा पट्टे के बीच घर्षण गुणांक 0.2 से 0.4 होता है।पट्टा पदार्थ 17.5 से 84N/mm² सामर्थ्य वाला होता है।

 

(2)वी-पट्टा- यह समलम्ब चतुर्भुज काट वाला होता है।इस पट्टे के लिए घिरनी की सतह पर भी वी के आकार का खाचा बना होता है।जिसमे पट्टा फस कर चलता है।खाचे का कोण 30° से 40° तक रखा जाता है।यह चमड़े या सूती डोरे और रबर को मिलाकर बनाया जाता है।इसमे अधिकतम तनाव प्रतिबल चपटे पट्टे से अधिक होता है।ये पट्टे अधिकतर फैक्ट्रीयो या कार्यशाला मे प्रयोग किया जाता है।

 

(3)रस्सा- यह वृताकार काट वाला होता है।घिरनी मे इनके प्रयोग के लिए,खाचे का कोण अधिकतर 45°का होता है।इनका प्रयोग प्रायः लम्बी दूरी के लिए शक्ति पारेषण के लिए किया जाता है।ये सूत,जटा या इस्पात के तारो को बट कर बनाया जाता है।

 

चपटा पट्टा चालन के प्रकार 

 

1)  खुला पट्टा चालन (Open Belt Drives ) – इसमें दोनों पुलियों पर पट्टा बाहर से लिपटा रहता है।  चालक तथा चलित शाफ्ट आपस में समानान्तर होते हैं तथा चालित शाफ्ट को चालक शाफ्ट को चालक शाफ्ट की दिशा में घुमाने की जरूरत होती है। छादन कोण छोटी पर कम तथा बड़ी पुली पर अधिक होता है।  खुला पट्टा चालन अधिक दूरी पर कम शक्ति पारेषण के काम आती है।

2) उपमुखी या क्रॉस पट्टा चालन ( Crossed Belt Drives ) – इसमे दोनों शाफ्ट समानान्तर होते हैं तथा दोनों घिरनियों  पर पट्टा क्रॉस में लिपटा रहता है। दोनों घिरनियों की घुमाव दिशा विपरित होती है।  दोनों घिरनियों पर छादन कोण के मान बराबर होते हैं। यह चालन कम दूरी पर अधिक  शक्ति पारेषण के लिए प्रयोग की जाती है।

तो दोस्तो आपको मेरी दी गई जानकारी कैसी लगी मुझे ज़रूर कमेंट करे।

अर्थिंग(earthing)क्या है?इसकी आवश्यकता क्यो होती है?

शक्तिमापी(dynamometer)किसे कहते हैं?

बिलासपुर शहर की महत्वपूर्ण बाते