Armature winding

 

Armature winding आर्मेचर वाइंडिंग इलैक्ट्रिकल मशीन का वह मुख्य भाग होता है।जिसमें E.M.F उत्पन्न होती है।A.C मशीनों में यह भाग स्टेटर पर बने आधे ढके या खुले स्लाटों पर लपेटा जाता है।जबकि D.C मशीन में आर्मेचर वाइंडिंग घूमती है।इस भाग में क्वाइलों के समूहों को निश्चित ढंग से जाना आर्मेचर वाइंडिंग कहलाता है।

 

आर्मेचर वाइंडिंग का समान

 

एक आर्मेचर को वाइन्ड करने के लिए आवश्यक पदार्थो को दो भागो में विभाजित किया जाता है।

 

1.कन्डक्टिंग मटेरियल

 

2.इन्सुलेटिंग मटेरियल

1.कन्डक्टिंग मटेरियल – छोटी मशीनों के आर्मेचर में गोल काॅपर कन्डक्टर का प्रयोग किया जाता है।लेकिन अधिक आऊटपुट वाली मशीनों में आयताकार कन्डक्टर लगाये जाते है।जिसे स्ट्रिप कन्डक्टर कहते है।कन्डक्टरो को इन्सुलेट करने के लिए प्रयोग किए गए इन्सुलेशन के अनुसार उन्ही के नाम से पुकारा जाता है।इलैक्ट्रिकल मशीनों के आर्मेचर में निम्नलिखित कन्डक्टर प्रयोग किये जाते है।

 

1.(१)एन्मेल्ड वायर
(२)सुपर एन्मेल्ड वायर : 6 S.W.G से 44 S.W.G तक उपलब्ध है।

 

2.(१)सिंगल काॅटन कवर्ड काॅपर एन्मेल्ड वायर
(२)डबल काॅटन कवर्ड काॅपर एन्मेल्ड वायर : 12 S.W.G से 48 S.W.G तक के साइज उपलब्ध है।

 

3.(१)सिंगल सिल्क कवर्ड काॅपर एन्मेल्ड वायर
(२)डबल सिल्क कवर्ड काॅपर एन्मेल्ड वायर : 14 S.W.G से 48 S.W.G तक के साइज उपलब्ध है।

 

4.स्ट्रिप कन्डक्टर – ये कन्डक्टर आकार में चपटे होते है।
और अधिक करंट कैपेसिटी की मशीनों के लिए प्रयोग किये जाते है।ये स्ट्रिपें अच्छी क्वालिटी के इन्सुलेटिंग टेप से ढकी होती है।उपरोक्त सभी वाइंडिंग वायर किलोग्राम की रीलों में उपलब्ध होती है।

 

2.इन्सुलेटिंग मटेरियल – शार्ट सर्किट या अर्थ फाल्ट से बचने के लिए इलैक्ट्रिकल मशीनों में प्रयोग होने वाले इन्सुलेटिंग मैटेरियल नमी रोधक होने चाहिए।इस्तेमाल होने वाला इन्सुलेशन मशीन की वोल्टेज पर निर्भर करता है।अधिक वोल्टेज की मशीनों के लिए स्लाटो को माइकानाइट या इम्प्रिगनेट माइका की तह से इन्सुलेट किया जाता है।इलैक्ट्रिकल मशीनों में इन्सुलेशन के लिए निम्नलिखित पदार्थो का प्रयोग किया जाता है।

 

एम्पायर क्लाथ – यह काला या पीला स्लाॅट इन्सुलेशन है।इसका साइज इसकी मोटाई के अनुसार मिल में मापा जाता है।और यह 7 मिल से 10 मिल तक उपलब्ध है।यह नमी रोधक है।और इसकी डाई इलैक्ट्रिक स्ट्रेन्थ अच्छी है।

मिलिनेक्स – यह बहुत अच्छा स्लाॅट इन्सुलेशन है।यह रंग में दूध कि तरह सफेद है।और 5 से 10 मिल मोटाई का होता है।और किलोग्राम या मीटर के रोलों में उपलब्ध है।यह भी नमी रोधक है।

 

लेदेराइड पेपर – इसको भी स्लाॅट इन्सुलेशन के लिए प्रयोग किए जाते है।इसकी मैकेनिकल तथा डाईइलैक्ट्रिक स्ट्रेन्थ अच्छी है।यह रंग का स्लेटी होता है।और 5 से 10 मिल मोटाई का होता है।और किलोग्राम या मीटर रोलों में उपलब्ध है।

 

फिल्म लेदेराॅइड – इन्सुलेटिंग फिल्म से ढका लेदेराइड़ पेपर फिल्म लेदेराइड कहलाता है।यह एक अच्छा स्लाॅट इन्सुलेटिंग पदार्थ है।और 5 से 15 मिल की मोटाई का होता है।और किलोग्राम या मीटर के रोलों में उपलब्ध है।यह महंगा होता है।

माइकानाइट – माइका को शैलाक के साथ मिलाकर माइकानाइट तैयार किया जाता है।और कभी – कभी पेपर या कपड़े पर माइकानाइट जमा देते है।तब इसे क्रमशः माइकानाइट पेपर या माइकानाइट क्लाथ कहते है।यह बहुत अच्छा स्लाॅट इन्सुलेशन है।इसकी डाईइलैक्ट्रिक स्ट्रेन्थ अच्छी है।यह नमीरोधक या अग्निरोधक है।इसे हल्का सा गर्म करके स्लाॅट में प्रयोग करते है।यह 2 से 6 मि.मी मोटी शीटो में उपलब्ध होता है।

 

 

फाइबर – इसे भी स्लाॅट इन्सुलेशन की तरह प्रयोग किया जाता है।जिसका प्रयोग वाइंडिंग पूरी होने के बाद स्लाटों को बंद करने या ट्रर्मिनल प्लेट बनाने के लिए किया जाता है।यह कत्थई भूरा है।1.0 से 15 mm मोटाई में उपलब्ध होता है।

 

काॅटन टेप या सिल्क टेप – इसे क्वाइलों या वाइंडिंग को टेप करने के लिए किया जाया है।और यह 12,20 तथा 25 mm चौड़ाई के 50 या 100 मीटर के रोलों में उपलब्ध होती है।काॅटन टेप की अपेक्षा सिल्क टेप अधिक तापमान पर कार्य कर सकती है।

 

 

एम्पायर टेप – यह एम्पायर क्लाॅथ से बनायी जाती है।और इसका प्रयोग तारों,केबलों इत्यादि को इन्सुलेट करने के लिए किया जाता है।यह नमीरोधक है और 12,20 तथा 25mm चौड़ाई के 50 और 100 मीटर के रोलों में उपलब्ध होती है।

 

 

ग्लास टेप – यह ग्लास रूई से बनायी जाती है।और इसका प्रयोग विशेष तौर पर अधिक तापमान पर कार्य करने वाली क्वाइलों और वाइंडिंग को इन्सुलेट करने के लिए किया जाता है।यह भी सभी साइज में उपलब्ध है।

 

 

स्लीव – स्लीव मोटर के वाइंडिंग जोड़ो तथा लीड़ो को इन्सुलेट करने के लिए प्रयोग किया जाता है।इसे सूत,एम्पायर क्लाथ,P.V.C तथा ग्लास काॅटन का बनाया जाता है।इसलिए इसे क्रमशः काॅटन स्लीव,एम्पायर स्लीव,P.V.C स्लीव और ग्लास काॅटन स्लीव कहते है।काॅटन स्लीव को D.C आर्मेचर वाइंडिंग और इसकी फिल्ड वाइंडिंग में प्रयोग करते है।यह 1 MM से 4MM साइज तक विभिन्न रंगों में 50 और 100 मीटरों के रोलों में उपलब्ध होती है।एम्पायर स्लीव आमतौर पर A.C आर्मेचर वाइंडिंग में प्रयोग की जाती है।और एक मीटर की लम्बाई में उपलब्ध होती है।जिसका व्यास 1 MM से 6MM तक होता है।मेन लीडो को इन्सुलेट करने के लिए अधिकांशतः P.V.C स्लीव प्रयोग किया जाता है।क्योकी यह नर्म और वाइंडिंग में उत्पन्न उष्मा के कारण पिघल जाती है।इसलिए A.C आर्मेचर वाइंडिंग के अंदर इसका प्रयोग करना वर्जित होता है।जहाँ एक मशीन को अधिक तापमान का कार्य करना हो वहाँ ग्लास स्लीव प्रयोग की जाता है।

बाइडिंग थ्रेड़ – यह मजबूत इन्सुलेटिंग पदार्थ का बना होता है।क्योंकी इसे क्वाइलों,जोड़ो और वाइंडिंगों को बांधने के लिए प्रयोग किया जाता जाता है।

 

बॉस – यह पूर्ण रूप से सूसा होना चाहिए क्योंकि इसका प्रयोग स्लाटो की खपच्चियां बनाने के लिए किया जाता है।इप खपच्चियों का कार्य मशीन के समान्य कार्य के समय क्वाइलों को बाहर आने से रोकना है।

 

रेजिन कोर्ड सोल्डर – आर्मेचर वाइंडिंग में सभी जोड़ो को सोल्डर करना बहुत आवश्यक होता है।और इस कार्य के लिए टिन और लेड क्रमशः 60%:40% या 50% :50% के एलाॅय को प्रयोग किया जाता है।खोखली सोल्डर तार का रेजिन से भर देते है।और तब उसे रेजिन कोर्ड सोल्डर वायर कहते है।जो 10,12 और 14 S.W.G में उपलब्ध होती है।तथा प्रत्येक 400,500 ग्राम रोलो में उपलब्ध होती है।

 

 

फ्लक्स या सोल्डरिंग पेस्ट – रेजिन एक समान्य फ्लक्स है,जिसका प्रयोग विशेष तौर से कम्यूटेटर सेग्मेंट को सोल्डर करने के लिए किया जाता है।क्योंकी यह एसिडिक प्रभाव से मुक्त होता है।
A.C आर्मेचर वाइंडिंग के जोड़ो को सोल्डर करने के लिए केवल सोल्डरिंग पेस्ट ही प्रयोग की जाती है।यह आधे किलोग्राम के डिब्बे में उपलब्ध होती है।

 

इन्सुलेटिंग वारनिश – यह मुख्य और महत्वपूर्ण इन्सुलेटिंग पदार्थ है।जिसे वाइंडिंग पूरी होने के पश्चात प्रयोग किया जाता है।यह 1,2,5 और 10 लीटर के डिब्बे मे उपलब्ध होती है।

 

1.वाइंडिंग के इन्सुलेशन को मजबूत करती है।

 

2.यह वाइंडिंग को मजबूती से बांधे रखती है।

 

3.यह वाइंडिंग में नमी के प्रवेश को रोकती है।

 

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